राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कौन से कानून में कर रहे हो कर्मचारियों से एक दिन के वेतन की कटौती, 16 अक्टूबर 2020 तक मांगा जवाब

सिरोही-राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ व शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने न्यायालय के राज्य  सरकार को अघोषित वेतन कटौती के संबंध मे किये प्रश्न का स्वागत किया ।महासंघ के प्रदेश संयुक्त महामंत्री गोपालसिंह राव के अनुसार राजस्थान सरकार  गैर कानूनी व संविधान की भावना के विरूद्ध कर्मचारियों व अधिकारियों को आर्थिक उत्पीड़न दे रही है ।जिससे मजबूरन कर्मचारी न्यायालय की शरण मे जा रहे है । हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार से पूछा है कि वह कर्मचारियों के वेतन में एक दिन की कटौती किस कानून के तहत कर रही है।याचिका में कहा, केवल प्रशासनिक आदेश के जरिए कर्मचारियों के वेतन से कटौती गलत है । हाईकोर्ट ने कोविड: 19 संक्रमण के दौरान कर्मचारियों से हर महीने एक दिन वेतन की कटौती मामले में राज्य सरकार व वित्त विभाग सहित अन्य पक्षकारों से 16 अक्टूबर 2029 तक पूछा है कि यह कटौती किस कानून में हो रही है। जस्टिस एसपी शर्मा ने यह अंतरिम निर्देश अर्जुनलाल शर्मा की याचिका पर दिया।याचिका में कहा कि राज्य सरकार ने कोविड: 19 के दौरान मार्च-अप्रैल में कर्मचारियों का 16 दिन का वेतन स्थगित कर दिया। साथ ही अब हर महीने कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काट रहे हैं। जबकि राज्य सरकार केवल वित्तीय आपातकाल या फिर कानून बनाकर ही कर्मचारियों के वेतन से कटौती कर सकती है। *याचिका में कहा, केवल प्रशासनिक आदेश के जरिए कर्मचारियों के वेतन से कटौती गलत है*।देश के संविधान के अनुसार, कर्मचारियों का वेतन उनकी संपत्ति है और उसमें कटौती नहीं की जा सकती। केवल प्रशासनिक आदेश के जरिए कर्मचारियों के वेतन से कटौती करना गलत है। इसलिए राज्य सरकार वेतन कटौती करने से पहले कानून बनाए। गौरतलब है कि राज्य सरकार कोविड: 19 संक्रमण का हवाला देते हुए प्रशासनिक आदेश के जरिए वित्तीय मितव्ययता के आधार पर कर्मचारियों के वेतन से एक दिन की कटौती कर रही है।महामंत्री राव ने बताया की अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहने दो दोनों कार्यकाल में कर्मचारियों का आर्थिक उत्पीड़न ही हुआ है ।यह तीसरा कार्यकाल इसकी पुष्टि करता है ।इतिहास यह भी है कि गहलोत के दोनों कार्य काल के बाद सरकार को भारी बहुमत से बदलना पडा है ।तीसरी बार भी वहीं इतिहास दोहराये जाने की तैयारी हो रही है ।वेतन भत्ते दे न सके , वो सरकार निकम्मी है ।जो सरकार निकम्मी हो , वह सरकार बदलती है । सरकार के निर्णय का महासंघ प्रदेश अध्यक्ष विजयसिंह धाकड , महामंत्री राकेश शर्मा ,अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय सचिव मोहन पुरोहित ,सम्पतसिंह , अरविन्द कुमार व्यास , देवलाल गोचर , उमरावलाल वर्मा , बसंत जिन्दल ,अमरजीतसिंह,राजेन्द्रसिंह राठौड़ , दशरथसिंह भाटी , मदनसिंह राठौड़ , भंवरसिंह राठौड़ ,दीपसिंह देवल , मनोहरसिंह उदावत ,मनमोहन शर्मा ,सतीश शर्मा , विजय गौतम, डूंगरसिंह , शैतानसिंह ,वीपीसिंह , सरप्रतापसिंह ने विरोध जताकर ।न्यायालय के राज्य सरकार को किये प्रश्नों को कर्मचारियों की जीत बताया ।

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