फर्जी मार्कशीट से 38 साल नाैकरी की, रिटायरमेंट के दिन सामने आई धांधली


कोटा में खान विभाग के सहायक प्रशासनिक अधिकारी लेखराज मीणा ने फर्जी मार्कशीट के आधार पर 38 साल नौकरी कर ली। उसके इस फर्जीवाड़े की पोल भी बुधवार को खुली, जिस दिन उसका रिटायरमेंट होना था। खान मंत्री के स्तर से इस मामले की प्रारंभिक जांच कराने के बाद खान निदेशक को कार्रवाई के लिए लिखा गया है। साथ ही कोटा एमई को निर्देशित किया है कि कर्मचारी आज ही रिटायर होने जा रहा है, इसलिए आवश्यक कार्रवाई समयानुसार की जाए।

कोटा में जैसे ही मंत्री के यहां से फैक्स आया तो ऑफिस में हड़कंप मच गया। लेखराज के रिटायरमेंट की पार्टी होनी थी, वह धरी रह गई। कुछ ही देर में वह भूमिगत भी हो गया। अब इस मामले में विभागीय स्तर पर कार्रवाई के साथ-साथ आरोपी कार्मिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी चल रही है।

उसके सारे परिलाभ रोकने के आदेश भी जारी किए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि कुछ समय पहले ही खान मंत्री को लेखराज के बारे में शिकायत मिली थी, जिसमें कहा गया था कि उसकी हायर सेकेंड्री की मार्कशीट फर्जी है। इस पर मंत्री के ऑफिस से 23 जुलाई को सचिव, माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश को मार्कशीट की सत्यता की जांच के लिए लिखा गया। इसकी जांच के बाद वहां से 26 जुलाई को जवाब आया कि उक्त मार्कशीट कूटरचित है और यह हमारे यहां से जारी मार्कशीट से भिन्न है।

एक माह में एपीओ हो चुके हैं 4 कर्मचारी, भ्रष्टाचार का मामला भी सामने आया

 

कोटा में खनिज विभाग पर पिछले कुछ समय से जैसे ग्रहण लग गया है। कर्मचारियों में इस बात की चर्चा है कि विभाग में एक के बाद एक इस तरह की कार्रवाइयां कभी नहीं हुई। बजरी पर कार्रवाई नहीं करने से खफा मंत्री ने गत दिनों कोटा ऑफिस के 4 अधिकारियों-कर्मचारियों को एपीओ कर दिया था। इसके बाद विभाग का एक और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया, जिसमें तत्कालीन एडीएम ने निदेशक को एसीबी जांच की अनुशंसा की थी। अब रिटायरमेंट वाले दिन लेखराज के मामले से हर कोई डरा हुआ है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से विभाग में स्थानीय स्तर पर कर्मचारी दो गुटों में बंटे हुए हैं और आए दिन एक-दूसरे की शिकायतें कर रहे हैं।

फर्जी जाति प्रमाण पत्र का भी सामने आ चुका मामला : कोटा में इससे पहले पीएचईडी के तत्कालीन एडिशनल चीफ इंजीनियर रामकिशन भारतीय का भी फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मामला सामने आ चुका। इसमें बूंदी कलेक्टर ने जांच कराई थी और सरकार को रिपोर्ट भेजी थी। हालांकि बाद में रामकिशन ने वीआरएस ले लिया था।

1949 की जगह 1959 बताया जन्म का वर्ष 

मंडल के रिकॉर्ड के अनुसार असल मार्कशीट में उसकी जन्म तिथि 1 जून 1949 है, जबकि फर्जी मार्कशीट में 12 जुलाई, 1959 कर दी गई है। साथ ही नाम व पिता के नाम के फोंट भी बदले हुए हैं। सूत्रों ने बताया कि लेखराज 1981 से विभाग में कार्यरत है और उसके समयबद्ध प्रमोशन भी होते रहे हैं। खान निदेशक ने बुधवार काे ही लेखराज काे ज्ञापन जारी करके अपना पक्ष रखने काे कहा है अाैर तय समय पर जवाब नहीं देने पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी है।