8 में से 7 प्रोजेक्ट डिले, खजाना खाली…किस्तें चुकाने का चैलेंज


नेशनल केपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड ने जेडीए से उनके लोन की उधारी पर चल रहे प्रोजेक्ट की प्रोग्रेस जानी है। इसके लिए मंगलवार को दिल्ली में बोर्ड बैठक है। इसमें जेडीसी सहित डायरेक्टर इंजीनियर प्रोजेक्ट की प्रोग्रेस रिपोर्ट रखेंगे। अफसर बताएंगे कि लोन के पैसे का किस तरह उपयोग हो रहा है और कुछ प्रोजेक्ट को आगे चलाने के लिए बकाया किश्त की बात भी रखी जाएगी। इसके लिए दो दिन से जेडीए में सभी प्रोजेक्ट की डिटेल रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

हकीकत यह है कि जेडीए के इतिहास में पहली बार बीजेपी सरकार में एक साथ 8 बड़े प्रोजेक्ट हाथ में लिए गए। इनमें से फिलहाल एक आरओबी का काम पूरा हुआ है, जबकि ज्यादातर प्रोजेक्ट डिले हैं। जेडीए के लिए कांग्रेस सरकार में सबसे बड़ा सिरदर्द प्रोजेक्टों की उधारी है। आनन फानन में 1700 करोड़ के लोन पर काम शुरू कर लिए गए। इनमें से कुछ का ब्याज शुरू हो गया है, तो अगले साल से जेडीए को मूल चुकाना पड़ेगा। पहले साल में ही करीब 250 करोड़ तक जेडीए को इन प्रोजेक्ट के पेटे एनसीआरपीबी को किश्त देनी है, जिसकी फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं दिख रही।

रिंग रोड से कमाई मिलती, जेडीए उसमें भी फेल 

जेडीए फिलहाल जो 8 प्रोजेक्ट हाथ में लिए है, उनमें से किसी में कोई इनकम नहीं है। केवल द्रव्यवती रीवर फ्रंट के आसपास की जमीनों के ऑक्शन से जेडीए को बड़ी उम्मीद है, लेकिन यहां अभी विवादों के चलते कोर्ट ने ऑक्शन पर रोक लगाई हुई है। दूसरी ओर केवल एक रिंग रोड प्रोजेक्ट से टोल के जरिए आय होती, लेकिन जेडीए इस प्रोजेक्ट को करने में फेल रहा और अब यह काम एनएचएआई के जरिए कराया जा रहा है।

बिना वित्तीय हकीकत जाने घोषणाएं की
जेडीए में पहली इतने प्रोजेक्ट का काम उधारी पर हो रहा हो। वित्तीय हकीकत का भी आंकलन नहीं किया गया। बीजेपी सरकार में घोषणाओं के मुकाबले काम नहीं हुए। द्रव्यवती से एलिवेटेड व आरओबी प्रोजेक्ट डेढ़ साल तक डिले हो रहे हैं।

द्रव्यवती में 1100 करोड़ का लोन
आरओबी-एलिवेटेड के अलावा द्रव्यवती रीवर फ्रंट में एक हजार करोड़ लोन की राशि जेडीए को मिल चुकी, जबकि स्वीकृत लोन 11 सौ करोड़ से ज्यादा है। 3 बार डेडलाइन बढ़ाने के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ।

प्रोजेक्ट डिले हैं, पूरा कराने की कोशिशें तेज
“हां, प्रोजेक्ट की डेडलाइन तो निकल गई, अब उनको पूरा कराने की हरसंभव कोशिश है। द्रव्यवती मामले में कार्रवाई करनी है। झोटवाड़ा एलिवेटेड की राह में पुनर्वास का इश्यू पेंडिंग है, जिसे आने वाले समय में क्लियर कराएंगे। लोन की किश्तें चुकाने के लिए जेडीए अपनी तैयारी करेगा। उम्मीद है, इसमें ज्यादा परेशानी नहीं आएगी।” -टी. रविकांत, जेडीसी

सभी ऑनगोइंग प्रोजेक्ट में सिर्फ आनंदलोक का ही काम पूरा हुआ

प्रोजेक्ट लागत स्वीकृत लोन अब तक रिलीज खर्चा प्रोग्रेस
सीतापुरा आरओबी 116 करोड़ 79 करोड  64 करोड़ 49.73 56%
दांतली आरओबी 99.92 करोड़  59 करोड़ 36 करोड़  44.65  72.60
जाहोता आरओबी 76 करोड़ 27 करोड़ 36 करोड़ 19.65  35.99
आनंदलोक आरओबी 29 करोड़ 22 करोड़ 13 करोड़ 13.15 100 %
एलिवेटेड हवा सड़क 250 करोड़ 187 करोड़ 90 करोड़  108.60 50.98
बस्सी आरओबी  57 करोड़ 35.50 करोड़ 17.50 करोड़ 25.07 75.12
झोटवाड़ा आरओबी 166 करोड़ 125 करोड़ 0 9.25 8.50