नीट काउंसलिंग के बाद मेडिकल काॅलेजों में पहली बार 705 सीटें खाली रही, हंगामा

नीट काउंसलिंग इस बार भी विवादों में है। काउंसलिंग के दोनों राउंड पूरे हाेने के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि जब प्रदेश के 23 सरकारी अाैर निजी मेडिकल काॅलेजाें में 705 सीटें खाली रह गईं। पिछले साल सिर्फ तीन सीटें खाली रही थीं। इस बार एसएमएस मेडिकल काॅलेज की 20 सीटाें सहित सरकारी काॅलेजाें की 75 सीटें खाली रही।

सीटाें के खाली रहने और कम रैंक वाले छात्रों को अधिक अंक वालों से अच्छे अौर सस्ते कॉलेज मिलने से काउंसलिंग सिस्टम पर सवाल उठ गए। एसएमएस मेडिकल कॉलेज में अभ्यर्थियों व परिजनों ने हंगामा किया। जेएलएन रोड जाम करने का प्रयास किया। देर रात तक हंगामा जारी रहा। नाराज परिजन सीएम अशाेक गहलाेत व डिप्टी सीएम सचिन पायलट से मिलने पहुंचे। सीएम हाउस पर लिखित में शिकायत देकर आए। अब सेकंड राउंड की काउंसलिंग दोबारा कराए जाने या छात्रों के कोर्ट में जाने का विकल्प है।

चार दिन तक मैपिंग की लेकिन यह पता ही नहीं लगा पाए कि कौन स्टूडेंट पहले एडमिशन ले चुका

पहली काउंसलिंग 26 जुलाई को पूरी हुई। दूसरी काउंसलिंग एक दिन के बाद होनी थी। लेकिन तारीख दी 1 अगस्त। कहा गया कि जिन्होंने पहले राउंड के बाद अन्य कॉलेज में एडमिशन ले लिया है, उनकी मैंपिंग कर रहे हैं। एक अगस्त को दूसरी काउंसलिंग की गई। बड़ा सवाल यह कि चार दिन तक क्या मैपिंग हुई? क्योंकि 705 सीट खाली रहने का मतलब यह कि इतने स्टूडेंट प्रदेश के बाहर प्रवेश ले चुके थे और काउंसलिंग कराने वालों काे पता ही नहीं चला या जानबूझकर यह सब छिपाया गया। सीटें भरी जाती तो सरकारी कॉलेजों के पास पैसा आता और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होता।

कम रैंक वाले छात्रों को ज्यादा रैंक वालों से अच्छे कॉलेज

इस बार पहला मौका है जब नीट में 705 सीटें खाली रही हैं। पिछली बार वर्ष 2018 में केवल तीन सीटें ही खाली रही थीं। इसे लेकर अभ्यर्थियों और परिजनों ने नाराजगी जताई। सुबह काउंसलिंग शुरू होते ही लोग नाराजगी जताने लगे और आपत्ति जताई। वहीं, राजस्थान युवा डॉक्टर्स फाउंडेशन, भीम सेना सहित अनेक मेडिकल आर्गनाइजेशन ने भी जमकर विरोध जताया। काफी देर तक नारेजबाजी होती रही। मामला बढ़ता देख कॉलेज प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी और विरोध जताने वालों से समझाइश की। इस दौरान कई संगठन वाले जेएलएन मार्ग जाम करने के लिए पहुंचे लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां से फिर से कॉलेज परिसर में भेज दिया। मामला कोर्ट में जाना भी तय दिख रहा है। ऐसे में अभ्यर्थियों का भविष्य अंधेरे में नजर आ रहा है। विराेध इसलिए भी जायज है, क्याेंकि जिन स्टूडेंट्स ने पहले राउंड के बाद प्रदेश के बाहर अन्य मेडिकल कॉलेज में एडमिशन ले लिया, उनकी सीट ब्लॉक कर दी गई। अब मॉपअप राउंड में इन सीटों को दिया जा रहा है, जबकि दूसरे राउंड की काउंसलिंग में ही इन सीट को अलॉट करना चाहिए था।

काउंसलिंग तय नियमों से हुई : नीट चेयरमैन
राज्य सरकार की ओर से तय नियमों के अनुसार ही काउंसलिंग करा रहे हैं। जिस भी व्यक्ति से आपत्ति मिल रही है, वे आपत्तियां उच्च स्तर पर भेजी जा रही हैं। हमारी कोशिश है कि हर समस्या का समाधान किया जाए। -डॉ. सुधीर भंडारी, चेयरमैन, नीट

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