टिकट कटने की आशंका से अजमेर के BJP विधायकों में खलबली



इन दिनों अजमेर जिले के भाजपा विधायकों में आगामी चुनावों में टिकट कटने की संभावना से खलबली मची हुई है। माना जा रहा है कि सात भाजपा विधायकों में से चार का टिकट कटना तय है। अजमेर में भाजपा के सात विधायकों में से चार राज्यमंत्री की सुविधाएं ले रहे हैं।
अजमेर शहर के दोनों भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी और अनिता भदेल स्वतंत्र प्रभार के मंत्री हैं तो केकड़ी के शत्रुघ्न गौतम और पुष्कर के भाजपा विधायक सुरेश सिंह रावत संसदीय सचिव के तौर पर राज्यमंत्री की सुविधाओं का उपभोग कर रहे हैं।
किशनगढ़ के भागीरथ चैधरी, मसूदा की श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा और ब्यावर के भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत ही ऐसे विधायक हैं, जिन्हें मंत्री का दर्जा नहीं मिला है। हालांकि च ौधरी और रावत दूसरी बार विधायक चुने गए। लेकिन पहली बार विधायक बने गौतम और रावत को संसदीय सचिव बनाया दिया गया।
जानकार सूत्रों के अनुसार भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश भर के भाजपा विधाकों के काम काज का गोपनीय आंकलन कराया है। हालांकि अधिकांश भाजपा विधायकों का आंकलन प्रतिकूल रहा है। लेकिन माना जा रहा है कि अजमेर में चार भाजपा विधायकों के टिकट कटना तय है। भले ही ऐसे विधायक विकास कार्यों का कितना भी दावा करें लेकिन अपने कृत्यों से चर्चाओं में रहते हैं।
किसी विधायक का गाली गलौज वाला आॅडियो राष्ट्रीय नेतृत्व के पास पहुंच रहा है तो किसी विधायक की अपने क्षेत्र में कार्यकर्ताओं से ही पटरी नहीं बैठ रही है। आम लोगों में भी विधायकों की कार्यशैली को लेकर असंतोष व्याप्त है। जिस तरह से हाल ही के लोकसभा के उपचुनाव में अजमेर जिले के सभी आठों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा, उससे तो इन भाजपा विधायकों की पोल ही खुल गई है।
भाजपा का एक भी विधायक अपने क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार को जिताने में सक्षम नहीं रहा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब उपचुनाव में ही ये विधायक अपने क्षेत्र से बढ़त नहीं दिलवा सके तो फिर स्वयं चुनाव कैसे जितेंगे? विधायकों के आपसी झगड़े भी हाई कमान तक पहुंचे हैं। सब जानते हैं कि अजमेर शहर में स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवननी और महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती अनिता भदेल एक दूसरे के निर्वाचन क्षेत्रों में जा नहीं सकते।
हालात इतने खराब है कि देवनानी अपने शिक्षा विभाग का कोई कार्यक्रम भदेल के दक्षिण क्षेत्र में नहीं करते और इसी प्रकार श्रीमती भदेल अपने महिला एवं बाल विकास विभाग का कोई कार्यक्रम देवनानी के उत्तर विधानसभा क्षेत्र में नहीं करती हैं। दिखाने को भले ही संगठन के मंचों पर दोनों एक साथ नजर आते हों, लेकिन इस एकता के बारे में भाजपा के कार्यकर्ताओं को भी पता है।
इसी प्रकार किशनगढ़ के भाजपा विधायक भागीरथ च ौधरी की भी स्थानीय कार्यकर्ताओं से पटरी नहीं बैठती है। नगर परिषद के पूर्व सभापति सुरेश टांक कई बार किशनगढ़ की स्थिति के बारे में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को जानकारी दे चुके हैं। ब्यावर के भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत के व्यवहार को लेकर भी स्थानीय कार्यकर्ताओं ने शिकायत की है।
पुष्कर के भाजपा विधायक और संसदीय सचिव सुरेश सिंह रावत को तो 29 मई को ही विरोध का सामना करना पड़ा। सरकार के न्याय आपके द्वार शिविर को रावत को बीच में छोड़ कर जाना पड़ा। ग्रामीणों ने रावत पर आरोप लगाया कि पिछले साढ़े चार साल में विकास का कोई कार्य नहीं किया। केकड़ी के विधायक शत्रुघ्न गौतम को लेकर भी सम्पूर्ण क्षेत्र में असंतोष व्याप्त है।
हाल ही में गाल गलौज का जो एक ओर आॅडियो सामने आया है उस पर तो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अजमेर देहात के भाजपा अध्यक्ष बीपी सारस्वत से संवाद भी किया। लेकिन वहीं मसूदा की भाजपा विधायक श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा और उनके समाज सेवी पति भंवर सिंह पलाडा भीषण गर्मी में भी इन दिनों ग्राम पंचायत स्तर पर जनसेवा शिविर लगा रहे हैं। पलाड़ा के किसी भी शिविर में विवाद की कोई खबर नहीं है। पिछले साढ़े चार वर्षों में पलाड़ा दम्पत्ति ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में कार्यकर्ताओं और आम लोगों से निरंतर सम्पर्क बनाए रखा है।