पक्षी वैविध्य आधारित छायाचित्र व टिकट प्रदर्शनी शुरू



जयपुर। देश-विदेश की विविध पक्षी प्रजातियों की दिनचर्या, प्रवास एवं विविधता का विशाल खजाना समेटे छायाचित्र एवं डाक टिकट आधारित वृहद प्रदर्शनी शनिवार को उदयपुर सूचना केन्द्र की कलादीर्घा में शुरू हुई। प्रदर्शनी का शुभारंभ वन विभाग के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. जी.वी.रेड्डी ने किया। इस अवसर पर मुख्य वन सरंक्षक राहुल भटनागर, अक्षय सिंह, डीएफओ हरिणी वी. सुहेल मजबूर, एसीएफ शैतानसिंह देवड़ा, पक्षी विशेषज्ञ विक्रम सिंह, वी.एस.राणा, प्रताप सिंह चुण्डावत सहित जगमालसिंह, सहायक निदेशक (जनसंपर्क) कमलेश शर्मा, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर दिनेश जैन, डूंगरपुर के पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक वीरेंद्रसिंह बेडसा, पक्षीप्रेमी रूपेश भावसार, मुकेश पवार आदि मौजूद थे।
मुख्य वन संरक्षक राहुल भटनागर ने बताया कि इस प्रदर्शनी में 120 प्रजातियों के पक्षियों  के 126 फोटोग्राफ्स शामिल किये गये हैं। इन फोटोग्राफ्स में 40 फोटोग्राफर्स ने अपनी छायाचित्र कला का योगदान दिया है। प्रदर्शनी में शामिल मंगोलिया, साइबेरियाई, यूरोपियन सहित अन्य विदेशी एवं स्वदेशी प्रजातियों के जलीय एवं पेड़ों पर रहने वाले पक्षियों के रंगीन फोटोग्राफ्स कलात्मक अंदाज से खींचे गए है।
उप वन संरक्षक (वन्यजीव) हरिणी वी. ने बताया कि प्रदर्शनी में तितलियों का जीवन चक्र, उड़ते उल्लू, बतखें, नीलगाय पर बैठी मैना, सारस, क्रेन की उड़ान, उगते चांद के सामने बैठा मोर, बाज पर हमला करता बाज, पानी में भोजन ढूंढते फ्लेमिंगो आदि के फोटो आकर्षण का केन्द्र है।
डाक टिकटों पर दिखा परिंदों का संसार
प्रदर्शनी स्थल पर विश्वभर में पक्षियों पर जारी किए गए डाक टिकटों की विशाल प्रदर्शनी भी विशेष आकर्षण का केन्द्र रही। इस प्रदर्शनी के तहत उदयपुर की डाक टिकट संग्रहकत्र्ता पुष्पा खमेसरा द्वारा भारत सहित विश्व के 249 से अधिक देशों द्वारा जारी किए गए पाँच हजार से अधिक डाक टिकटों को प्रदर्शित किया गया है। करीब 4 लाख टिकटों का संग्रह करने वाली श्रीमती खमेसरा ने पक्षी केन्दि्रत प्रदर्शनी में सन् 1871 का पश्चिमी आस्ट्रेलिया के प्राचीन टिकट से लेकर 2017 के कलेक्शन में से टिकटों का चयन कर प्रदर्शित किया है, जिसे आगंतुको ने बेहद सराहा ।
तितलियों के जीवनचक्र का हुआ जीवंत प्रदर्शन
प्रदर्शनी में पहली बार चार तितलियों के जीवनचक्र का लाईव प्रदर्शन भी किया जाएगा। इसमें तितलियों पर शोध कर रहे डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा कस्बे के तितली विशेषज्ञ मुकेश पंवार तथा उदयपुर की नेहा मनोहर द्वारा तितलियों के जीवनचक्र के फोटोग्राफ्स के साथ होस्ट प्लांट पर लार्वा  व प्यूपा का लाईव प्रदर्शन किया गया तथा तितलियों के जीवनचक्र के बारे में जानकारी दी गयी।