भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष तिवारी को उनके पद से हटा सकती है भाजपा!


2019  के लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इन दिनों संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल को अंजाम दे रही है। आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के प्रदेश अध्यक्षों को बदलने के बाद अब चर्चा है कि भाजपा दिल्ली में भी बड़ा उलटफेर कर सकती है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी को उनके पद से हटा सकती है। बताया जा रहा है कि दिल्ली के सीनियर नेताओं से मनोज तिवारी का तालमेल ठीक नहीं बैठ पा रहा है, जिसे देखते हुए पार्टी उन्हें अध्यक्ष पद से हटा सकती है।

सीनियर नेताओं से नहीं बैठ रहा तालमेल

गौरतलब है कि फिल्मी दुनिया से राजनीति में प्रवेश करने वाले मनोज तिवारी ने 2013 में भाजपा की सदस्यता ली थी। भाजपा ने पहले उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट दिया और फिर दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी। अध्यक्ष बनने के बाद से ही दिल्ली भाजपा में मनोज तिवारी और पार्टी के पुराने नेताओं के बीच तालमेल सही नहीं बैठ पाया। पार्टी के पुराने नेता विजय गोयल और विजेंद्र गुप्ता से मनोज तिवारी की कड़वाहट की खबरें कई बार सामने आईं। अब खबर है कि आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा दिल्ली संगठन में फेरबदल के तहत मनोज तिवारी को पद से हटा सकती है।

एमसीडी चुनाव में दिखी कड़वाहट

आपको बता दें कि पिछले साल जब दिल्ली में एमसीडी के चुनाव हुए थे तो केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल ने सभी जीते हुए पार्षदों को दावत पर बुलाया था। इस पर मनोज तिवारी ने ऐतराज जताते हुए पार्षदों को विजय गोयल के कार्यक्रम में जाने से मना कर दिया। इसके पीछे तर्क दिया गया कि पार्टी या पार्टी इकाई प्रमुख की सहमति के बिना पार्षद किसी मंत्री के ऐसे भोज में नहीं शामिल हो सकते। हालांकि इसकी असल वजह कुछ और थी।

2019 से पहले पार्टी की बड़ी रणनीति

इसके अलावा विजेंद्र गुप्ता से भी मनोज तिवारी का तालमेल ना बैठ पाने की खबरें आती रहती हैं। कहा जाता है कि दिल्ली में बहुत कम ऐसे मौके आए हैं, जब दोनों नेता साथ देखे गए हों। इसे देखते हुए ही चर्चा है कि दिल्ली के भाजपा संगठन में फेरबदल किया जा सकता है। हाल ही में आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के प्रदेश अध्यक्षों ने भी अपने पदों से इस्तीफा दिया है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले इसे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की एक बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।