राफेल के सवाल पर कांग्रेस के पाप क्यों गिना रही है बीजेपी?


“एक ऐसा व्यक्ति जिसके पूरे परिवार ने बोफोर्स मामले में घूस लेकर भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा की थी. इनका पूरा परिवार इस देश में भ्रष्टाचार की जननी है और राहुल गांधी हमारे प्रधानमंत्री जी के बारे में ऐसी ओछी बात करते हैं.”

केंद्र सरकार के क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को वो सब बातें याद दिलाने की कोशिश की जिनके आधार पर उनके मुताबिक़ राहुल गांधी राफेल डील विवाद में मौजूदा प्रधानमंत्री पर उंगली उठाने लायक ही नहीं हैं.

राहुल गांधी ने शनिवार को ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करके रफ़ाल डील के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी चुप्पी तोड़ने को कहा था.

गांधी परिवार को क्यों कहा भ्रष्टाचारी?

सबसे दिलचस्प यह है कि जब राहुल गांधी रफ़ाल डील पर केंद्र सरकार से जवाब मांग रहे हैं तब बीजेपी की ओर से कांग्रेस को उसके कथित पाप याद दिलाने की कोशिश क्यों हो रही है.

शास्त्रों मतलब तर्कशास्त्र की भाषा में इसे ही व्हाटअबाउटरी कहा गया है. ये एक बेहद मारक हथियार है.

और स्टेल्थ तकनीक ऐसी कि टीवी से चिपककर प्राइमटाइम बहस सुनता दर्शक भी चकरा जाए कि पलक झपकते ही बहस रफ़ाल विमान से क्वात्रोची पर कैसे पहुंच गई.

लेकिन एक बार जो ये हथियार चल गया तो इसके सामने दुनिया का बड़े से बड़े एंकर भी पानी मांग जाए.

इसका सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि आपके ऊपर जैसे ही एक मुश्किल सवाल आता तो आप एंटी-मिसाइल सिस्टम से भी तेज़ गति से सवाल को हवा में ही चकनाचूर करके सवाल पूछने वाले को ही कठघरे में खड़ा कर देते हैं.

टीवी पर होने वाली बहसों में ये अक्सर देखने में आता है. इसकी वजह भी है क्योंकि प्रवक्ताओं के सामने रोज़ाना ऐसे सवाल सामने आते हैं जिनके जवाब ख़ूबसूरती से टालने की वजह से ही प्रवक्ताओं की तरक्की होती है.

व्हाटअबाउटरी कहां से आया?

राजनीतिक बहसों में सवालों के जवाब देने का ये तरीका वर्तमान सरकार का आविष्कार नहीं है.

जानकारों के मुताबिक़, व्हाटअबाउटरी शीत युद्ध की देन है.

दरअसल, जब अमरीका और सोवियत संघ विश्व पटल पर एक दूसरे को नीचे दिखाने की कोशिश किया करते थे तब इस हथियार को बखूबी इस्तेमाल किया गया.

ये वो दौर था जब पूंजीवाद और साम्यवाद किसी भी तरह से खुद को दूसरे से बेहतर साबित करने की होड़ में थे.

ऐसे में जब अमरीका सोवियत संघ के ख़िलाफ़ मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाता था.

लेकिन जब सोवियत संघ इसके जवाब में कहता था – “एंड यू आर लिंचिंग नीग्रोज़’. इसका मतलब “और तुम तो अफ़्रीकी अमरीकियों को सामूहिक रूप से घेरकर मार रहे हो” है.

वरिष्ठ पत्रकार मधूसूधन आनंद कहते हैं, “क्यूबा मिसाइल संकट से पहले अमरीका और सोवियत संघ के बीच इसी तरह की बयानबाजी हुई थी. लेकिन जब सोवियत संघ को पता चला कि ये संकट गंभीर हो गया है तब उन्होंने जरूरी कदम उठाए.”

इसके बाद अमरीका की ओर से उछाला गया सवाल सोवियत संघ की व्हाटअबाउटरी श्रेणी की मिसाइल से टकराकर पानी में डूबकर मर जाया करता था.

लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि ये पश्चिम से ही आई हो. व्हाटअबाउटरी का इतिहास भी महर्षि व्यास के महाकाव्य महाभारत में ही मिल जाता है.

महाभारत में नियमों का उल्लंघन करके दुर्योधन की जंघा तोड़े जाने पर जब बलराम क्रोधित हुए. इस पर कृष्ण ने भीम का बचाव करते हुए उन्हें दुर्योधन के पाप याद दिलाते हुए कहा कि भीम ने प्रतिज्ञा कर रखी थी.

बलराम कृष्ण के इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुए और क्रोधित होकर द्वारिका चले गए थे.