12 साल तक के बच्चों के साथ बलात्कार पर मौत की सज़ा को मिली कैबिनेट की मंज़ूरी


केंद्रीय कैबिनेट ने 12 साल तक के बच्चों के साथ बलात्कार के मामले में दोषियों को फांसी की सज़ा दिए जाने संबंधी अध्यादेश को मंज़ूरी दे दी है. इसके बाद अब कोर्ट इस तरह के मामलों में दोषी को मौत की सज़ा सुना सकेंगे.

आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि आपराधिक कानून में संशोधन संबंधी इस अध्यादेश के माध्यम से भारतीय दंड संहिता, साक्ष्य क़ानून, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और लैंगिक अपराधों से बालकों से संरक्षण कानून (यानी पोक्सो एक्ट) में नए प्रावधान लाए जाएंगे ताकि ऐसे मामलों में दोष साबित होने पर मौत का सज़ा सुनाई जा सके.

हाल में जम्मू कश्मीर के कठुआ में 8 साल की एक बच्ची और गुजरात के सूरत में एक बच्ची के साथ बलात्कार करने के बाद उन्हें मार दिया गया था. उत्तर प्रदेश के उन्नाव में भी एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का मामला सामने आया था. कठुआ और उन्नाव के मामलों के लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए और पोक्सो कानून में कड़े प्रावधान की मांग उठी. बचपन में ‘गंदी हरक़त’ के शिकार बच्चों कैसे मिले न्याय

 

अध्यादेश में क्या प्रस्ताव है?

  • महिला के साथ बलात्कार की कम से कम सज़ा 7 साल से बढ़ा कर 10 साल तक सश्रम कारावास करने का प्रस्ताव है. इसे आजीवन कैद में भी बदला जा सकता है.
  • 16 साल की उम्र तक की लड़की का बलात्कार करने की कम से कम सज़ा 10 साल से बढ़ा कर 20 साल तक सश्रम कारावास करने का प्रस्ताव है. इसे आजीवन कारावास यानी जीवन पर्यंत क़ैद में भी बढ़ाया जा सकता है.
  • 16 साल तक की बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार के सभी मामलों में जीवन पर्यंत क़ैद की सज़ा करने का प्रस्ताव है.
  • 12 साल तक की बच्ची के बलात्कार के केस में कम से कम 20 साल क़ैद या जीवन पर्यंत क़ैद या मौत की सज़ा की प्रस्ताव दिया गया है.
  • 12 साल तक की बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले जीवन पर्यंत क़ैद या मौत की सज़ा का प्रस्ताव है.