सरकारी अंशदान के 10 लाख हड़पने की साजिश, विवाह सम्मेलन का आयोजन, 58 जोड़े पहले से शादीशुदा


बांसवाड़ा. क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि काेई सामूहिक विवाह सम्मेलन ही पूरी तरीके से फर्जी हाे। दूल्हा-दुल्हन के वेश में शादीशुदा जाेड़े। नकली घराती और नकली बराती। पूरा ड्रामा सिर्फ इसलिए कि सामूहिक विवाह सम्मेलन के लिए संस्था काे सरकारी अंशदान के 10 लाख रुपए मिल जाएं और जाेड़ाे काे दहेज का सामान।

ऐसा ही 58 जाेड़ाें का सामूहिक विवाह सम्मेलन सज्जनगढ़ क्षेत्र के पाडला वड़खियां में 18 जून काे हाेने वाला है। सामूहिक विवाह सम्मेलन का सच जानने के लिए भास्कर टीम शनिवार काे प्रशासन काे साैंपी सूची में बताए जाेड़ाे के घराें पर पहुंची। इसमेें सामने आया कि सभी जाेड़े पहले से शादीशुदा है। कुछ के ताे बच्चे भी हैं। इन्हें महज दहेज के सामान और कुछ पैसाें का लालच देकर तैयार किया गया।

फर्जी सामूहिक विवाह की याेजना एनजीओ औषध पादप संस्थान के अध्यक्ष और सज्जनगढ़ के पूर्व प्रधान रमण डामाेर ने पाडला वड़खियां की पूर्व सरपंच शीला के साथ मिलकर तैयार की। सामूहिक विवाह सम्मेलन में सरकार एक जाेड़े पर 18 हजार रुपए का अंशदान देती है। ऐसे में 10.44 लाख रुपए मिलते। यह सब इसी के लिए किया गया।

रमण डामाेर ने प्रधान के समय संपर्क में आए परिचिताें काे इसमें फंसाया। इनमें से अधिकतर वे है जिनकी शादी एक से डेढ़ साल पूर्व हुई। इन सबसे सामूहिक विवाह के लिए आवेदन फार्म भरवाया गया। यह आवेदन चार माह से लिए जा रहे थे। कुछ काे शादी के रजिस्ट्रेशन के बारे में बताकर गुमराह किया। संस्था ने 7 जून काे कलेक्टर काे सामूहिक विवाह सम्मेलन के लिए आवेदन किया था। सम्मेलन 15 जून काे हाेना था, लेकिन बाद में अधूरी तैयारी का हवाला देकर
इसे 18 जून काे करने की सूचना प्रशासन काे दी गई।

एक चूक ने संदेह पैदा किया और भास्कर ने पूरा मामला खाेल दिया
एनजीओ औषध पादप संस्थान ने जल्दबाजी में प्रशासन काे साैंपी सूची काे जांचा नहीं। सूची में जन्मतिथि के अनुसार पांच जाेड़े नाबालिग थे। महिला बाल विकास संस्थान ने नाबालिग जाेड़ाें का विवाह रुकवाने के लिए गांव में संपर्क किया ताे संदेह हुआ कि ऐसा काेई विवाह ही नहीं हाे रहा है। इस बीच तहसीलदार खातुराम कटारा भी गांव पहुंचे, लेकिन आयाेजन रमणलाल ने बड़ी चतुराई से तैयारी नहीं हाेने का हवाला देकर 18 जून काे विवाह समाराेह रखने की लिखित में अनुमति मांग ली। प्रशासन ने ताे मामले काे गंभीरता से नहीं लिया कि भास्कर टीम सामूहिक विवाह सम्मेलन का सच जानने के लिए शनिवार काे सभी जाेड़ाें के घर पहुंच गई और फर्जीवाड़ा खुल गया।

बच्चे हो गए फिर भी फेरे लेने की तैयारी

केस-1 शादी काे चार साल हाे गए, दाे बच्चे भी हैं
सामूहिक विवाह सम्मेलन की सूची में 28वें नंबर पर नाम। बारीगामा के वनेलापड़ा में यह घर था राजेश पुत्र कंवरजी का। राजेश की शादी चार साल पहले शीला पुत्री धीरजी से हाे चुकी है। उनके दो बच्चे भी हैं। पैसे के लालच में फिर से फेरे लेने को तैयार हो गया।

केस-2 तीन साल पहले शादी, अब ससुर ने ही लिखवाया नाम
सामूहिक विवाह सम्मेलन की सूची में 33वें नंबर पर नाम। सज्जनगढ़ कस्बे के ही संदलाई छोटी के मुकेश पुत्र गोविंद डोडियार की शादी तीन साल पहले 30 मई 2017 काे सागवा निवासी नीता पुत्र लखमा निनामा से हो गई। मुकेश बोला कि ससुरजी ने फार्म भरा था। उन्हें लालच दिया गया था कि कुछ पैसे मिलेंगे। इसलिए फार्म भर दिया।

केस-3 सालभर पहले शादी, पैसे के लालच में लिखाया नाम
सामूहिक विवाह सम्मेलन की सूची में 8वें नंबर पर नाम। सज्जनगढ़ कस्बे के गराड़िया गांव के गुनेश पुत्र रतनलाल की शादी एक साल पहले सांगेला निवासी कलावती पुत्री सोहनलाल डामोर से हुई थी। कलावती ने बताया कि उन्हें पैसों का लालच दिया गया था, इसलिए नाम लिखाया।

अगर ऐसा मामला है तो कार्रवाई होगी
^हां, यदि ऐसा मामला है कि जो जोड़े हैं वो शादीशुदा हैं और उन्हें पता ही नहीं है कि इस तरह से फर्जीवाड़ा किया जा रहा है, तो निश्चित रूप से हम इस मामले में कार्रवाई करवाएंगे। सोमवार को विभाग खुलते ही इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर जांच कराई जाएगी। – आशीष गुप्ता, जिला कलेक्टर, बांसवाड़ा