आज करें सूर्य देव की पूजा इस आरती से



कहूँ लगी आरती दास करेंगे,
सकल जगत जाकी जोत बिरजेसात।
समुद्र जाके चर्णानी बसे,
कहा भयो जल कुम्भ भरे हो राम।

कोटि भानु जाके नख की शोभा,
कहा भयो मंदिर दीप धरे हो राम।
भार अठारह राम बलि जाके,
कहा भयो शिर पुष्प धरे हो राम।

छप्पन भोग जाके नितप्रति लागे,
कहा भयो नैवेद्य धरे हो राम।
अमित कोटि जाके बाजा बाजे,
कहा भयो झंकार करे हो राम।

चार वेद जाके मुख की शोभा,
कहा भयो ब्रह्म वेद पढ़े हो राम।
शिव सनकादि आदि ब्रह्मादिक,
नारद हुनी जाको ध्यान धरें हो राम।

हिम मंदार जाको पवन झकोरे,
कहा भयो शिव चंवर दुरे हो राम।
लख चौरासी वन्दे छुडाये,
केवल हरियश नामदेव गाये।
हो राम… ।