कश्मीर में साल के अंत तक चुनाव, राष्ट्रपति शासन 3 जनवरी को खत्म होगा; विधानसभा में अब 83 सीटें हो सकती हैं


केंद्र सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे। इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पेश किया है। इसके पारित होते ही जम्मू-कश्मीर विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश होगा। लद्दाख भी केंद्र शासित प्रदेश कहलाएगा, लेकिन वहां विधानसभा नहीं होगी। पुनर्गठन के बाद कश्मीर में इस साल के अंत तक चुनाव हो सकते हैं। राज्य में तीन जनवरी 2019 तक राष्ट्रपति शासन लागू है।

पिछले साल 20 जून को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने घाटी में राज्यपाल शासन लगा दिया था। 21 नवंबर 2018 को राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर दी। तब कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पीडीपी को समर्थन देकर सरकार बनाने की कोशिश की थी। हालांकि, राज्यपाल ने इसे मंजूरी नहीं दी थी। इसके बाद मोदी सरकार ने यहां 28 दिसंबर 2018 से राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया। इसकी अवधि समाप्त होने के पहले ही जुलाई में इसे 6 माह के लिए बढ़ा दिया गया।

जम्मू-कश्मीर में पहले 87 विधानसभा सीटें थीं। लेकिन, लद्दाख को अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद चार सीटें कम हो सकती हैं। यानी अगर वर्तमान परिसीमन ही जारी रहता है तो जम्मू-कश्मीर में 83 विधानसभा सीटें होंगी।

2018 में भाजपा ने पीडीपी से समर्थन वापस लिया

2014 में जम्मू-कश्मीर की 87 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनावों में पीडीपी को 28, भाजपा को 25, नेशनल कांफ्रेंस को 15, कांग्रेस को 12 और अन्य को सात सीटें मिली थीं। चुनाव के दो महीने बाद पीडीपी और भाजपा ने मिलकर राज्य में सरकार बनाई थी। मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद 2016 में महबूबा मुफ्ती जम्म-कश्मीर की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थीं। हालांकि, गठबंधन सरकार लगभग तीन साल ही चल पाई। 2018 में भाजपा ने समर्थन वापस लिया और महबूबा को इस्तीफा देना पड़ा।

2014 विधानसभा चुनाव के नतीजे:

पार्टी सीट वोट प्रतिशत
पीडीपी 28 22.9
भाजपा 25 23.2
जेकेएन 15 21
कांग्रेस 12 18.2
आईएनडी 3 6.9
अन्य 4 7.8