मिसाल ; मुस्लिम बच्चे सीख रहे हैं संस्कृत, श्लाेक-गायत्री मंत्रोच्चारण, कुरान भी पढ़ते हैं


शिक्षा का कोई धर्म नहीं होता। यही मिसाल पेश कर रहे हैं राजधानी के ऐसे 6 संस्कृत स्कूल जहां एक हजार मुस्लिम बच्चे संस्कृत का ज्ञान ले रहे हैं। शहर की चारदीवारी के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में स्थित इन स्कूलों के पढ़ने वाले बच्चों को गायत्री मंत्र, श्रीमद भागवत गीता का सार सीखने से कोई गुरेज नहीं। इनमें एक स्कूल ताे एेसी है जहां बच्चे संस्कृत पढ़ने से पहले सुबह मदरसे में जाकर कुरान अाैर उर्दू की पढ़ाई करते हैं। यहां पढ़ने वाले बच्चे सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र सहित अन्य हिंदू धर्म के ग्रन्थों की बेमिसाल जानकारी रखते हैं।

महाराजा संस्कृत कॉलेज 
12वीं तक संस्कृत में अध्ययन करने के बाद बच्चे संस्कृत कॉलेज में ज्योतिष, धर्म शास्त्र, वेद, हवन करना, कर्मकांड को पढ़ते हैं। अभी वर्तमान में 15 बच्चे कॉलेज में पढ़ते हैं।

राउप्रा संस्कृत विद्यालय, बधा बस्ती
यह स्कूल दो शिफ्ट में लगता है। सुबह 7 से 12:30 बजे तक सामान्य स्कूल व 1 से 6 बजे तक संस्कृत स्कूल चलता है। स्कूल के प्रधानाध्यापक ओमप्रकाश कहते हैं अभिभावक व बच्चे संस्कृत में रुचि रखते हैं इसीलिए दोपहर में संचालित संस्कृत स्कूल में बच्चे आते हैं। सबसे बड़ी दिलचस्प बात यह है की बच्चे श्रीमद भागवत गीता के श्लोक, गायत्री मंत्र बड़े आसानी से बोल लेते हैं। मुस्लिम छात्रा अमरी का पिछले साल गीता प्रतियोगिता में तीसरा स्थान आया था।
राजकीय प्रवेशिका संस्कृत स्कूल, खेतड़ी हाउस 

यहां बच्चे 2004 से संस्कृत पढ़ रहे हैं। वर्तमान में यहां 274 बच्चों में से 250 बच्चे मुस्लिम हैं, जो संस्कृत पढ़ रहे हैं। यहां कार्यरत प्रधानाचार्य निधि शर्मा के अनुसार की सरकार द्वारा नियमानुसार पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जाता है। शिक्षा के माध्यम से समरसता सौहार्द भाव पैदा कर रहे हैं। राजकीय उच्च प्राथमिक संस्कृत विद्यालय, भट्टा बस्ती : यहां 447 बच्चे हैं जो सभी मुस्लिम हैं। यहां पढ़ने वाले बच्चे सुबह मदरसों में कुरान अाैर उर्दू पढ़ते हैं और दोपहर में संस्कृत।

राजकीय महाराज वरिष्ठ संस्कृत सी.सै.स्कूल, हवामहल 
हवामहल स्थित रामचंद्रजी मंदिर में इस संस्कृत स्कूल की नींव 1852 में रखी गई थी। कुछ समय पहले तक दो मुस्लिम संस्कृत के अध्यापक थे जिन्होंने 22 साल तक यहां पढ़ाया है। वर्तमान में यहां 134 में से 53 मुस्लिम विद्यार्थी संस्कृत सीख रहे हैं। शिक्षक गजानंद के अनुसार बच्चे अपनी इच्छा से योग, सूर्यनमस्कार करते हैं। स्कूल का समय एक बजे तक का है लेकिन 12.30 बजे नमाज पढ़ने के लिए छुट्टी दे दी जाती है।

श्री खांडल विप्र वरिष्ठता उपाध्याय संस्कृत स्कूल, मानकायस्त चौक  
यह स्कूल 1916 से है, जिसे वर्तमान में खांडल विप्र समिति चला रही है। यहां 90 बच्चों में से 30 बच्चे मुस्लिम हैं जो संस्कृत पढ़ते हैं। प्रधानाचार्य पूनम भास्कर के अनुसार मुस्लिम बच्चे बिना कहे अपने अभिभावकों के साथ हवन में धोती-कुर्ता पहन कर आते हैं। बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन व गायत्री मंत्र का उच्चारण इच्छानुसार करते है।