नई दिल्ली में राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन



जयपुर। राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग की ओर से शुक्रवार को नई दिल्ली के राजस्थान हाउस में कार्यालयध्यक्षों की एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए जी.पी.एफ., बीमा, एन.पी.एस.,जी.आई.एस, मेडिक्लेम आदि विभिन्न खातों से जुड़ी सुविधाओं और सेवाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
नई दिल्ली में राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि की उप निदेशक श्रीमती संजू शर्मा ने कार्यशाला में पावर पाइंट प्रजेन्टेशन द्वारा कार्यालध्याक्षों को अवगत करवाया कि एस.एस.ओ. के माध्यम से एस.आई.पी.एफ. पोर्टल में सभी कर्मचारी स्वंय अपनी एम्प्लॉई आई.डी. (कर्मचारी पहचान पत्र) को लॉग ईन कर खाते की सम्पूर्ण जानकारी के साथ ही उस पर ऋण लेने और उसके दावे का भुगतान प्राप्त करने की सुविधा भी प्राप्त कर सकते है।
उन्हाेंने प्रतिनियुक्ति पर सेवारत अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा अपने खातों में जी.पी.एफ. एवं राज्य बीमा के अंशदान की राशि को ऑन लाईन पॉर्टल के माध्यम से जमा करवाने की सुविधा की जानकारी भी दी ।
उन्होने बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा सभी विभागों की सेवाओं को डिजिटल फॉरमेट में प्रदान करने की कवायद की दिशा में राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सभी ऋण/मेडिक्लेम दावों का निस्तारण ‘‘रियल टाईम बेसिस’ पर ऑनलाईन आवेदन के माध्यम से करना प्रारंभ कर दिया है।
श्रीमती शर्मा ने बताया कि दिल्ली में सेवारत राज्य सरकार के सभी कर्मियों को जिनकी नियुक्ति वर्ष 2004 के बाद हुई है उन्हें इस मेडिक्लेम डिजिटाइजेशन का फायदा मिलेगा। उन्होने बताया कि ऑनलाईन दावा प्रस्तुत करने के लिए सभी राज्यकर्मियों का 16 डिजिट की एम्प्लाई आई.डी. ही उनका लॉगिन आई.डी. होगा एवं यदि बीमित कार्मिक द्वारा पूर्व में अपना पासवर्ड परिवर्तित नहीं किया है तो उसकी जन्मतिथि ही उनका पासवर्ड होगा। श्रीमती शर्मा ने बताया कि बीमा संबंधी सभी प्रकार के दावों की सुविधा के लिए सभी कर्मियों को अपना ईमेल आईडी एवं मोबाईल नंबर अपडेट करना जरूरी है जिससे ऋण एवं मेडिक्लेम दावों से संबंधित पूर्ण सूचना राज्यकर्मी को बीमित को मोबाइल मैसेज अथवा ईमेल से प्राप्त हो सकेगी।
उन्होंने पॉवर प्वाईंट प्रस्तुतीकरण के द्वारा सभी मौजूद अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीकें से ऑनलाईन एवं ऑफलाईन सुविधाओं यथा स्वयं आई.डी. बनाना, पासवर्ड बदलना, ऋण अप्लाई कर उसका स्टेटस जानना, मेडिक्लेम पॉलिसी इत्यादि के बाद में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
उल्लेखनीय है कि 2004 के बाद नियुक्त राज्यकर्मियों कि मेडिक्लेम पॉलिसी में सभी राजकीय चिकित्सालयों/चिकित्सा महाविद्यालयों/अनुमोदित प्राईवेट चिकित्सालयों/राज्य के बाहर एवं दिल्ली के अनुमोदित चिकित्सालयों में सी.जी.एच.एस. पैकेज दरों पर अधिकतम बीमाधन की सीमा तक इण्डोर इलाज करवाये जाने पर पुनर्भरण की सुविधा प्रदान की गई है। राज्य सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2016-17 में मेडिक्लेम पॉलिसी में बीमाधन की सीमा को 02 लाख से बढ़ाकर 03 लाख रुपये कर दिया है।