पहली बार चीन भारत आ रहा जमीनी लड़ाई सीखने, थार में होगा युद्धाभ्यास


भारत की अपने परंपरागत प्रतिद्वंद्वी चीन के साथ पहली बार थार के रेगिस्तान में जमीनी लड़ाई में जोर आजमाइश होगी। पहाड़ों व बर्फीले स्थानों पर युद्ध करने में दक्ष मानी जाने वाली चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) तपते थार के धोरों में भारतीय सेना से लड़ाई के दौरान दुश्मन के इलाकों में घुसकर निर्णायक बढ़त लेना सीखेगी। इसे रक्षा कूटनीतिक तौर पर भारत की बड़ी जीत माना जा रहा है।

चीन के अलावा रूस सहित दुनिया की आठ देशों की सेनाएं पांचवीं आर्मी स्काउट मास्टर्स कॉम्पीटिशन में भाग लेने के लिए स्वर्ण नगरी जैसलमेर आएंगी। भारत में पहली बार इसका आयोजन 24 जुलाई से 17 अगस्त तक होगा। इसकी मेजबानी जोधपुर स्थित भारतीय सेना की कोणार्क कोर करेगी। इस प्रतियोगिता का मुख्य राउंड 6 से 14 अगस्त तक होगा। इसमें भारत के अलावा रूस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, जिम्बाब्वे, आर्मेनिया, बेलारूस व चीन शामिल होंगे। इन देशों में जोर आजमाइश होगी। इस प्रतियोगिता की तैयारियों का जायजा लेने के लिए रूस व चीन का एक सैन्य दल मंगलवार को जैसलमेर पहुंचा। यह प्रतियोगिता पांच चरण में होगी।

दुश्मन के इलाके में घुसकर सटीक जानकारी लेने का अभ्यास

स्काउट की मुख्य भूमिका युद्ध क्षेत्र में लीड करने की होती है। पेट्रोलिंग के दौरान स्काउट दुश्मन की गतिविधियों पर पैनी निगाह रखते हुए इसकी जानकारी एकत्र कर अपनी सेना के टुकड़ी को देता है। यह दुश्मन की मुख्य लाइन के पीछे होने वाली सैन्य हलचल व हथियारों की जानकारी भी एकत्र करता है। युद्ध के दौरान स्काउट की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह अपनी सेना के लिए आंख और कान का काम करता है। दुश्मन के क्षेत्र में घुसकर वहां अपने संपर्क बनाकर या फिर गुपचुप तरीके से उसकी रक्षा पंक्ति की पूरी जानकारी भेजता रहता है। इसके आधार पर ही उसकी सेना अपने हमले की रणनीति बनाती है।

5 चरणों में होगी स्पर्धा 

{ बीएमपी (टैंक जैसा छोटा वाहन) में दुश्मन के इलाके में घुसना।
{ एंबुश लगाना यानी घात लगाकर दुश्मन की सेना पर हमला बोलना।
{ छोटे हथियारों से दुश्मन पर फायरिंग कर बढ़त लेना।
{ पानी में तैरते हुए दुश्मन के इलाके में पहुंचकर आक्रमण करना।
{ कम नुकसान में ज्यादा फायदा उठाने के सिद्धांत अभ्यास