सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी आधार पर पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन की इजाजत



नई दिल्लीः आधार से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह यू.आई.डी.ए.आई. के सीईओ को आधार योजना से जुड़ी चिंताओं को आधारहीन साबित करने के लिए अदालत में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन (पीपीटी) देने की अनुमति दे।

इस पर चीफ जस्टिस (सीजेआई) दीपक मिश्रा ने कहा कि कोर्ट बेंच के अन्य जजों से सलाह लेकर पीपीटी के लिए वक्त निर्धारित करेगा। आधार की डाटा सिक्युरिटी, इसे लागू करने और सर्विलांस को लेकर कई टेक्निकल प्वाइंट हैं। आधार से जुड़ीं याचिकाओं पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में 5 जजों की बेंच सुनवाई कर रही है।

मौलिक अधिकार 
केंद्र की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा कि यू.आई.डी.ए.आई. के सीईओ इन तकनीकी पहलुओं पर ज्यादा स्पष्टता से जानकारी दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के दो पहलू हैं। एक में भोजन का अधिकार और शिक्षा का अधिकार आता है, जबकि दूसरा स्व-विवेक के अधिकार और निजता के अधिकार से जुड़ा है। उन्होंने कहा, सवाल यह है कि कौन सा पहलू मान्य होता है। उन्होंने कहा कि जीवन के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों को स्व-विवेक और निजता के अधिकार पर तरजीह दी जानी चाहिए।

आधार हुआ अनिवार्य
बता दें कि आधार से कई तरह की सेवाओं को लिंक करना बाध्‍यकारी किया जा चुका है। आधार से बैंक खातों को जोड़ने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2017 और मोबाइल से जोड़ने की अंतिम तिथि 6 फरवरी 2018 थी। इसी तरह आधार को पैन और इंश्योरेंस पॉलिसी से भी लिंक करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने 3 मुख्य दस्तावेजों को आधार से जोड़ने को अनिवार्य कर दिया था। इन दस्तावेजों से आधार को जोड़ने की आखिरी तारीख 31 मार्च 2018 रखी गई थी। इसके तहत आधार से पेन को जोड़ना भी शामिल था। पहले आधार से पैन को जोड़ने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2017 रखी गई थी लेकिन बाद में सरकार ने इसे बढ़ाकर 31 मार्च 2018 कर दिया।