सरकार को राजधर्म निभाते हुए करना चाहिए नीति निर्माण : चुनाव आयुक्त



जयपुर। देश के चुनाव आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा ने कहा कि सरकारों को राजधर्म के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए नीति निर्माण और उनका क्रियान्वयन करना चाहिए। कौटिल्य का अर्थशास्त्र राजा को असीमित शक्तियां प्रदान करता है लेकिन उसमें उल्लेख है कि प्रजा की खुशी में ही राजा की खुशी है और प्रजा के कल्याण में ही राजा का कल्याण नीहित है। इस आयोजन में प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को स्कॉलरिशप के चैक भी प्रदान किए गए।
श्री अरोड़ा हरिश्चन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान में गुरूवार को मीठा लाल मेहता मेमोरियल फाउंडेशन द्वारा शासन और नीति निर्माण विषय पर आयोजित तृतीय मीठा लाल मेहता स्मृति व्याख्यानमाला को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने  कहा कि मेरा उनके साथ गहरा जुड़ाव रहा था, उनका व्यक्तित्व ऎसा था कि उनसे रोज सीखने को मिलता था। उन्होंने कहा कि उनका महात्मा गांधी के ट्रस्टीशिप के सिद्धांत में गहरा विश्वास था और उसी के अनुसार कार्य करते थे।
देश के चुनाव आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा ने कहा कि पूर्व मुख्य सचिव श्री मीठा लाल मेहता समाज के अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर नीतियां बनाते थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अंत्योदय योजना जैसी कई जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से आम लोगों को फायदा पहुंचाया।
चुनाव आयुक्त श्री अरोड़ा ने कहा कि विश्व बैंक और मूडीज एजेंसी द्वारा रेटिंग सुधारी गई है, लेकिन इसके बावजूद हमें जमीनी हकीकत को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में भी हमें कौटिल्य की जनता के कल्याण वाले सिद्धांत को ध्यान में रखना चाहिए। हालांकि सरकारी संस्थाओं के साथ कई उद्योग घरानोें ने भी जनता के कल्याण के लिए काम किए हैं। उन्होंने टाटा और बिड़ला समूह का उदाहरण देते हुए कहा कि इन्होंने कई राष्ट्रीय महत्व की संस्थाओं की स्थापना की है।

ट्रस्ट की डॉ. रश्मि जैन ने बताया कि आगामी वर्ष से कृषि नवाचार में उल्लेखनीय कार्य करने वाले एक प्रमुख किसान को सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर हरिश्चंद्र माथुर लोक प्रशासन संस्थान की महानिदेशक गुरजौत कौर, सेवानिवृत्त आईएएस श्री अनिल जैन सहित बड़ी संख्या में नौकरशाहा और गणमान्य लोग उपस्थित थे।