बिना बुक कैसे पढ़े, बच्चे सरकारी स्कूलों में 19 दिन बाद भी नहीं पहुंची किताबें


स्कूलों में नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है लेकिन सरकारी स्कूलों में नवप्रवेशित स्टूडेंट्स को पढ़ने के लिए किताबें नहीं मिल रही है। अनेक स्कूलों में डिमांड के मुताबिक पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। ऐसे में बच्चों को पुरानी किताबों से ही काम चलाना पड़ रहा है। हालांकि 9वीं-10वीं में गणित व सामाजिक विज्ञान और 11वीं-12वीं में इतिहास व राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम में भी बदलाव हुआ है।

ऐसे में इन विषयों की पुरानी किताबें काम नहीं आ रही है। गणित के 6-7 अध्यायों में संशोधन किया गया है जिसके लिए पूरक पुस्तक लगाई गई है। उधर, कई विषय जैसे कक्षा-दो में अंग्रेजी, चौथी में गणित और 7वीं कक्षा में हिंदी की नई किताबों की कमी चल रही है। जिसे बच्चों को परेशान होना पड़ रहा है। सीडीईओ धर्मेंद्र कुमार जोशी ने बताया कि शाला दर्पण पोर्टल पर एक मॉडल शुरू किया गया है। जिन नोडल केंद्रों पर अतिरिक्त किताबें है वहां से लेकर अन्य जगह आपूर्ति की जाएगी। यदि इसके बाद भी कमी रही तो किताबों की अतिरिक्त डिमांड भेजेंगे।

वर्जन 
जिले से पुस्ततों की जितनी डिमांड आई थी उसके मुताबिक आपूर्ति कर दी गई है। स्कूलों में नए प्रवेश हो रहे हैं जो कि 31 जुलाई तक होंगे। यदि अतिरिक्त डिमांड आएगी तो उसके मुताबिक किताबों की सप्लाई कर दी जाएगी। निर्मल शर्मा, सहायक प्रबंधक, जिला पाठ्य पुस्तक मंडल

वर्जन
पिछले वर्ष के नामांकन में 10 प्रतिशत वृद्धि करके पुस्तकें छपाई जाए ताकि कोई भी बालक निशुल्क पुस्तक से वंचित नहीं रहे। महेंद्र पांडे, महामंत्री, राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ