शादी के एक साल बाद ही कश्मीर में पति शहीद; वीरांगना ने बेटा गोद लिया, उसे बनाना चाहती हैं सैनिक


शादी को एक साल भी नहीं हुआ कि पति कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए। गोद सूनी रह गई लेकिन पत्नी में वीरांगना भाव था, इसलिए सेना काे एक और जवान देने की साेच के साथ बच्चा गोद लिया। 8वीं कक्षा तक पढ़ी वीरांगना ने बेटे की अच्छी परवरिश के लिए फिर से पढाई शुरू की। अब कलेक्ट्रेट में लिपिक की जिम्मेदारी निभाते हुए बेटे परवरिश के साथ घर की जिम्मेदारी भी निभा रहीं हैं।

यह महिला है शहीद राजेंद्रसिंह गंठेड़ी की पत्नी लीलाकंवर। भदेसर तहसील के गंठेड़ी गांव निवासी मदनसिंह के पुत्र राजेंद्रसिंह का 1998 में भारतीय सेना में चयन हुआ। राजेंद्र इसके तीन साल बाद ही 2 जून 2001 को जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए। तब शादी को मुश्किल से एक साल ही हुआ था। शादी के समय भी राजेंद्र को कम ही छुट्टी मिली थी। क्योंकि करगिल में तनाव शुरू हो गया था।

राजेंद्रसिंह ड्यूटी पर चले गए। फिर घर लौटे तो बस शहीद बनकर। पत्नी लीलाकंवर कुछ दिन सदमे में रहीं, लेकिन हौसला नहीं खोया। खुद को नारी सशक्तीकरण का उदाहरण तो बनाया ही, देश की सेना को एक और जवान देने का सपना भी बुन लिया। एक दंपती को कहा कि उनके बेटा हो या बेटी। वह उसे गोद लेकर परवरिश करेंगी। मन में सोच लिया कि बेटा हुआ तो पति के नक्शे कदम पर उसे सेना के लिए तैयार करेंगी। उस दंपती के बेटा ही हुआ। लीलाकंवर ने आठ जून 2015 को उसे कानूनी प्रक्रिया पूरी कर गोद लिया। अंशराजसिंह नाम रखा। जो अब चार साल का हो चुका है। लीला ने बताया कि अंश को पढ़ लिखकर सेना के लिए तैयार करूं। मेरी पति को यह सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

नणदों से राखी बंधवाकर फिर पीहर जाती

राजेंद्रसिंह की शहादत उनकी तीनों बहनों के लिए भी किसी वज्रपात से कम नहीं थी। हालांकि एक भाई और है। लीलाकंवर रक्षाबंधन पर तीनों ननद से उसके साथ अपने हाथ पर भी राखी बंधवाती और फिर उदयपुर जिले में अपने पीहर जाती।

पति की शहादत के बाद 12वीं कक्षा पास की और फिर स्नातक किया 
शादी के समय लीलाकंवर आठवीं तक ही पढ़ी थी। पति की शहादत के बाद आगे पढाई करने की ठानी। प्राइवेट पढ़ते हुए 2004 में दसवीं और इसके बाद 12वीं बोर्ड परीक्षा पास की। इसके बाद सरकारी नौकरी की अर्जी लगाई। कलेक्ट्रेट में कनिष्ठ लिपिक के रूप में नियुक्ति हो गई। इसके बाद भी पढ़ाई नहीं छोड़ी। अब स्नातक करने के बाद वह वरिष्ठ लिपिक बन गईं। पढ़ाई का क्रम अभी जारी है।