आरटीआई में नहीं मांगनी पड़ेगी सूचना, अब जन सूचना पोर्टल पर सब मौजूद


जयपुर. आरटीआई के तहत जनता को सूचना ही नहीं मांगनी पड़े, इसके लिए सिविल सोसायटी और आईटी विभाग की दाे साल की मेहनत के बाद डिजिटल पोर्टल ‘जनसूचना’ बनाया गया है। मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने बिड़ला सभागार में शुक्रवार काे एकसाथ बटन दबाकर इस पार्टल काे लाॅन्च किया।

पोर्टल पर पब्लिक डिलीवरी वाले सभी विभागों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई है। शुरुआत 13 विभागों और 23 योजनाओं से की गई। इनमें राशन, नि:शुल्क दवा योजना, कर्जमाफी, अल्पकालीन ऋण, शाला दर्पण योजना, खनन आवंटन जैसे विशेष बाॅक्स रखे गए हैं। इससे जुड़ी जानकारी हर लाभार्थी ले सकेगा। दूसरे चरण में पब्लिक को नकद या गैर नकद डिलीवरी के सभी विभागों को डिजिटलाइज्ड किया जाएगा। पाेर्टल के उद्‌घाटन के दाैरान खचाखच भरे ऑडिटोरियम में सरकार के 10 मंत्री भी शामिल हुए।

आरटीआई का पहला बीज राजस्थान में बोया गया: गहलोत

गहलोत ने कहा कि सूचना के अधिकार कानून का बीज देश में सबसे पहले राजस्थान में बोया गया। अब जन सूचना पोर्टल 2019 शुरू कर जनता को घर बैठे अपने मोबाइल पर ही विभागों की वह हर जानकारी देंगे जो अब तक गुप्त रहती थी। उन्होंने आमजन से महात्मा गांधी की तरह गुस्सा पालने और उस गुस्से को अहिंसा के माध्यम से देश में ऐतिहासिक बदलाव का आह्वान किया।

गहलोत का मोदी पर हमला, कहा-देश में डर का माहौल

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत ने कहा कि राज्य सरकार आम जन को हर सूचना घर बैठे डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराकर माॅडल स्टेट बनने जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ मोदी सरकार के कारण देश में भय का माहौल है। मोदी इसरो के ऑफिस पहुंचते हैं। चंद्रयान को चांद पर भेजने को ऐसे प्रस्तुत करते हैं, जैसे इनकी 4 माह की सरकार में ही देश चांद पर पहुंचा है। पिछले 15 दिन में एक राज्य के जज सहित दो जवान आईएएस नौकरी छोड़ चुके हैं। ब्यूरोक्रेसी से लेकर सब मोदी राज में घुटन महसूस कर रहे हैं। अपनी बात बोलने के लिए अफसरों को नौकरी छोड़नी पड़ रही है। यह चिंता का विषय है।

‘हम गांधी के सिद्धांत पर काम कर रहे’
गहलाेत ने पीएम नरेंद्र मोदी पर दो बार हमला कर कहा आज दुनिया में देश का मान सम्मान बढ़ा है, वह 70 साल के शासन के कारण बढ़ा है। मोदी सरकार बनते ही चार महीने में नहीं बढ़ा है। इसरो को भी पूर्व पीएम नेहरु ने 1962 में शुरू किया तब जाकर अब चांद पर पहुंच रहे हैं। 35-40 साल लगे हैं उस इसरो को खड़ा करने में। लंबा सफर तय करना पड़ता है तब जाकर देश बनते हैं। हम गांधी के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं। गांधीजी भी एक एक्टिविस्ट थे। उन्होंने रेल से फेंकने पर गुस्से को पाला लेकिन दक्षिणी अफ्रिका में जवाब नहीं दिया। उन्होंने अहिंसा से जवाब देने का संकल्प लेकर अहिंसा से देश आजाद करा इतिहास बना दिया।