राजस्थानी मोट्यार परिषद् की सदस्य ने मानव हित को रखा सर्वोपरी अपना शरीर COVID -19 वैक्सिन के लिए सौंपा

 “जीना इसी को कहते हैं”
जी हाँ अपने लिए, अपने परिवार के लिए तो दुनिया जीती है पर पूरी मानवता के लिए जीया जाये और फिर भी जीते जी मानवता का भला नही करने वालो के लिए प्रेरणा स्रोत के रूप में उभर कर सामने आई है राजस्थानी मोट्यार परिषद् की सदस्या संगीता पड़िहार, जो कि महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय की राजस्थानी साहित्य की छात्रा भी है। उन्होंने जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार से अपील की है कि इस वैश्विक संकट Covid-19 के बचाव हेतु अगर वैज्ञानिकों को मानव शरीर की आवश्यकता पड़ती है तो मानवता की भलाई के लिए वो अपना जीवन भी दांव पर लगाने के लिए तैयार है। यह निर्णय उन्होंनेे अपने स्वविवेक से लिया है और लोगो को भी प्रेरणा लेने हेतु प्रोत्साहित किया है। विदित है कि पूरे विश्व मे अभी तक इस बीमारी का इलाज नही आया है और सब देशों के साथ भारतीय वैज्ञानिक भी इस कार्य मे निरन्तर जुटे हुए हैं। भारतीय वैज्ञानिकों को इस वैक्सीन को बनाने के लिए हो सकता है मानव शरीर की भी आवश्यकता रहेगी तो बीकानेर जस्सूसर गेट निवासी संगीता पड़िहार ने अपने आप को प्रस्तुत कर लोगो को प्रेरित करने का कार्य किया है। उनकी यह मांग राजस्थान सरकार तक जिला कलेक्टर के माध्यम से पहुंच चुकी हैं। इस तरह संगीता ने बहुत ही नेक कार्य का निर्णय लिया हैं।
इससे पहले भी राजस्थानी मोट्यार परिषद् इस महामारी में भी सर्वजन हितार्थ कार्य कर ही रही है जिसमें लोगो को राशन देना हो या मास्क बांटना, परिंडे लगाना,विद्यार्थियों की सुविधा हेतु राजस्थानी भाषा के नोट्स तैयार करना, दवाई वितरित करना आदि कार्यो में लॉकडाउन शुरु होते ही अपने स्तर पर मानव सेवा के लिए तत्पर हो गईं और अब इस कड़ी में अपना जीवन देकर भी मानवता की सेवा का संकल्प लेने के लिए मोट्यार परिषद् की सदस्या सामने आई हैं।
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