रथयात्रा से स्कूल में बेटियों की संख्या बढ़ाने वालीं कल्पना शर्मा हुई राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित


बनेड़ा के स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. कल्पना शर्मा को शिक्षक दिवस पर गुरुवार को दिल्ली में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार के लिए इस साल वे प्रदेश एक एकमात्र शिक्षक हैं, जिन्हें यह पुरस्कार मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सभी सम्मानित शिक्षकों से संवाद किया था। इस दौरान डॉ. कल्पना ने नामांकन बढ़ाने व ड्रॉप आउट बच्चों को विद्यालय से जोड़ने की बात बताई। पीएम मोदी ने डॉ. कल्पना से चार बार संवाद किया। इस दौरान डॉ. कल्पना के बताए एक छात्रा के जीवन में बदलाव की घटना सुनकर पीएम मोदी बहुत प्रभावित हुए।

नामांकन के लिए आपणी लाडो थीम पर रथयात्रा
बनेड़ा ब्लॉक शिक्षा की दृष्टि से पिछड़ा क्षेत्र माना जाता है। इसके छात्राओं का नामांकन बढ़ाने के लिए आपणी लाडो की थीम पर आधार पर नामांकन रथयात्रा निकाली। बच्चों को मॉडल स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों को प्रेरित करने के लिए गांव-गांव में यात्रा घूमी। ड्राप आउट विद्यार्थियों को मिस यू कार्ड देकर पुनः विद्यालय में बुलाया। निरंतर उपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों की माताओं को ‘जागरूक माता’ के रूप में सम्मानित किया।

स्कूल एक दिन मेधावी छात्रा के जिम्मे
डाॅॅ. शर्मा ने छात्राओं में नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने और सीखाने की दिशा में भी काम किया। इसके तहत मॉडल स्कूल की सीनियर मोस्ट छात्राओं को सभी छात्राओं की सहमति से एक दिन की प्रिंसिपल बनाया जाता है। उस दिन का विद्यालय प्रशासन पूरा उसके जिम्मे रहता है। ऐसा करने से अन्य छात्राएं भी प्रेरित होकर आगे पढ़ने के लिए अग्रसर होती हैं। इससे छात्राओं में लीडरशिप डवलप होती है। उनका डर निकलता है और भविष्य में उच्च शिक्षा की स्थिति में आने वाली चुनौतियों से यहीं सीखने की वजह से लड़ सकती हैं।

ग्रीन बाेर्ड और हर्बल-किचन गार्डन बनवाए
विभिन्न विद्यालयों में भामाशाहों, समुदाय, अभिभावकों को प्रेरित कर भूमि दान करवाई। ग्रीन बोर्ड, स्मार्ट क्लास रूम तैयार करवाए। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान की कक्षा 11 की जीव विज्ञान विषय की पुस्तक एवं संवेदना के स्वर पुस्तक लिखी। पर्यावरण के क्षेत्र में सीड बॉल निर्माण, हर्बल कीटनाशी, कचरा प्रबंधन, हर्बल एवं किचन गार्डन की स्थापना की।

बाल अधिकार क्लब बनाकर किया जागरूक
भीलवाड़ा जिले में बाल विवाह प्रथा बड़ी चुनौती है। इसको रोकने के लिए योगदान दिया। इसके तहत स्कूलों में पोस्टर प्रतियोगिता एवं बाल अधिकार क्लब का गठन करके अधिकारों के प्रति जागरूक किया। समाज की शख्सियतों से रूबरू कराया। इन सब गतिविधियों से बच्चों से यह प्रभाव पड़ा कि क्षेत्र में बाल विवाह को लेकर जागरूकता आई। क्योंकि भीलवाड़ा जिला प्रदेश में सबसे ज्यादा बाल विवाह वाले जिलों में शामिल है। इससे बेटियों की शिक्षा प्रभावित होती है।

जीवन में ऐसी कौनसी घटना है, जिसमें लगता है किसी विद्यार्थी के लिए वो घटना यादगार बन जाए : पीएम
मेरी 1996 में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रेजिडेंसी उदयपुर में बायलॉजी लेक्चरर के रूप में नई पोस्टिंग हुई थी। स्कूल में एक बालिका थी सविता सालवी। वह कक्षा 11 में साइंस बायलॉजी लेना चाहती थी। लेकिन विद्यालय का अन्य स्टाफ छात्रा के पढ़ाई में कमजोर होने से बायोलॉजी विषय दिलाने के पक्ष में नहीं था। उनका तर्क था कि नंबर कम आए तो बोर्ड का रिजल्ट खराब हो जाएगा। लेकिन छात्रा की पढ़ाई के प्रति लगन देखते हुए मैंने उसे बायोलॉजी विषय दिलाया। 1998 में मेरा तबादला बांसवाड़ा हो गया। जून 2016 में दिल्ली में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एज्युकेशन प्लानिंग एंड रिसर्च में एक माह की लीडरशिप प्रशिक्षण के लिए गई। वहां यकायक सविता सालवी से मिलना हुआ। सविता ने मुझे प्रमाण बोला और उसकी आंखों में आंसू आ गए। बोलीं – मैडम मैं यहां एनसीईआरटी में जूलॉजी की लेक्चरर डॉ. सविता सालवी हूं। यह सब आपके कारण ही संभव हुआ। यह मेरे लिए गर्व की बात थी।