भाजपा के दीनदयाल स्मारक पर ताला, गांधी-नेहरू परिवार पर बंपर घाेषणाएं


प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ महापुरुषों के नाम पर बने स्मारक और योजनाएं भी बदलने का चलन हो गया है। भाजपा सत्ता में थी तब जयपुर के धाणक्या में पंडित दीनदायल उपाध्याय का भव्य स्मारक बनाया गया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इस स्मारक का उद्घाटन किया। यहां दीनदयाल उपाध्याय की अष्टधातु की 15 फीट ऊंची आदमकद मूर्ति लगाई गई और 60 फीट ऊंचा चार मंजिला स्मारक बनाया गया है। स्मारक के निर्माण पर करीब 12 कराेड़ रुपए की लागत अाई थी। लेकिन सत्ता बदली और कांग्रेस शासन में आई इसके बाद दीनदयाल के स्मारक पर ताला लग गया है। वहीं बजट में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गांधी और नेहरू परिवार के नाम पर कई योजनाओं की घोषणाएं भी की हैं।

गहलोत ने जयपुर में 50 करोड़ की लागत से महात्मा गांधी संस्थान की स्थापना करने की घोषणा करने और 150वीं जयंती के आयोजनों की अवधि को एक साल और बढ़ाने के साथ ही प्रदेश में एक शांति और अहिंसा प्रकोष्ठ का गठन करने की घोषणा की। इसके अलावा कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर भी योजनाओं का ऐलान किया गया। इनमें बच्चों के लिए नेहरू बाल साहित्य अकादमी की स्थापना किए जाने की घोषणा की गई।

इंदिरा गांधी के नाम पर एक हजार करोड़ रुपए का फंड बनाया गया है। इस फंड  के जरिए प्रदेश के महिलाओं को कौशल विकास, शिक्षा,पीड़ित महिलाओं के विकास के लिए मदद की जाएगी। वहीं राजीव गांधी जल संचय योजना का ऐलान भी किया गया। गौरतलब है कि पिछली भाजपा सरकार ने प्रदेश में राजीव गांधी सेवा केंद्रों का नाम बदल कर अटल सेवा केंद्र कर दिया था।

इसके बाद सत्ता संभालते ही कांग्रेस ने इस आदेश को वापस ले लिया और अटल सेवा केंद्रों का नाम फिर से राजीव गांधी के नाम पर कर दिया। स्कूली शिक्षा से भी नाम हटाए-सियासी रंजिश का यह चलन सिर्फ स्मारकों और योजनाओं तक ही सीमित नहीं है। सत्ता बदलते ही स्कूली पाठ्यक्रम से महापुरुषों के नाम भी बदल जाते हैं। भाजपा शासन में थी तब पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी व डॉ. हेडगेवार के नाम जोड़े गए और कांग्रेस ने सत्ता संभालने के बाद संघ से जुड़े तमाम पदाधिकारियों के नाम शिक्षा की किताबों से हटाने की घोषणा कर दी।