जिले का पहला डिजिटल गांव मालूंगा, घी-चीनी की खरीद भी क्यूआर कोड से


तिंवरी के पास मालूंगा जिले का पहला ऐसा गांव है, जो केशलैस होने के साथ डिजिटल भी है। यहां के बाशिंदे घी-तेल, शक्कर, दाल खरीदने के लिए कैश की बजाए क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर भुगतान करते हैं। क्यूआर कोड की मदद से ग्रामीण लेन-देन भी डिजिटली कर रहे हैं। गांव के 325 लोगों को क्यूआर कोड दिया जा चुका है। रोजमर्रा के लेनदेन में नया सिस्टम लागू होने से इनकी जिंदगी आसान हो गई है। ऐसा ही कुछ बदलाव देचू के पास खेराजगढ़ गांव के लोगों की जिंदगी में भी आया है। दरअसल, यह गांव में यह बदलाव इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक (आईपीपीबी) लाया है। जिसने एक माह में गांव और उसमें रहने वालों को डिजिटल फ्रैंडली बना दिया। बैंक की ओर से पहले ग्रामीणों का खाता खुलवाया गया। इसके बाद इन्हें एक क्यूआर काेड दिया गया। साथ ही गांव की दुकानदारों काे मर्चेट एप दिया गया। ताकि वो ग्राहक दिए हुए सामान का पेमेंट लेने के लिए को दिए हुए क्यूआर कोड काे स्कैन कर सकें। स्कैन करते ही ग्राहक के मोबाइल पर ओटीपी आएगी। वह बताने पर ही खाते से पैसे कटेंगे। आईपीपीबी को यह टास्क सात दिन में पूरा करने को कहा गया था। ग्रामीणों के साथ देने का असर यह हुआ कि टास्क तय समय से पहले ही दो गांव में पूरा कर लिया गया।

स्मार्ट फोन अनिवार्य
आईपीपीबी की इस सर्विस को लेने के लिए स्मार्ट फोन होना अनिवार्य है। क्योंकि ग्राहक के क्यूआर कोड को स्कैन करने के लिए दुकानदार के पास स्मार्ट फोन होना चाहिए और ग्राहक के पास भी। दोनों के लिए दो अलग-अलग एप बनाए गए हैं। ताकि वो उनके यूज आ सकें। किसी के पास स्मार्ट फोन नहीं है तो वो इस सर्विस का फायदा नहीं उठा सकते हैं।

315 परिवार को जोड़ा
बैंक ने पहले हर परिवार के एक-एक सदस्य को अभियान से जोड़ा। इसके लिए आस-पास के गांवों की चार टीमों को लगाया गया। जिन्होंने 10-15 दिन में ही ग्रामीणों के खाते खोल दिए और क्यूआर कोड दे दिए। अब तक 315 परिवार जुड़ चुके हैं। इसमें दुकानदार भी शामिल हैं। इसके साथ ही और लोगों काे भी जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है।
उधार लेन-देन भी हो सकेगा
बैंक से जुड़े लोगों ने बताया कि चूंकि यह एटीएम कार्ड नहीं है। इसलिए अगर किसी को अचानक पैसे की जरूरत पड़ जाए तो वह दूसरे से संपर्क कर खाते में पैसे ट्रांजेक्शन कर सकते हैं।