महबूबा का भाजपा पर जवान कार्ड खेलने का आरोप, पूछा- राज्य में 9 लाख सैनिक क्या कर रहे हैं


जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को भाजपा पर वोटों के लिए जवान कार्ड खेलने का आरोप लगाया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘अगर कश्मीर में सब कुछ सामान्य है तो वहां 9 लाख सैनिक क्या कर रहे हैं? वे पाकिस्तान की ओर से होने वाले किसी हमले को रोकने के लिए वहां नहीं हैं, बल्कि विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए हैं। सेना की प्राथमिक जिम्मेदारी सीमाओं की सुरक्षा करना है, न कि असंतोष को कुचलना।’’

इस बीच राज्य से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही निगरानी में रखे गए तीन नेताओं यावर मीर (पीडीपी), शोएब लोन (कांग्रेस) और नूर मुहम्मद (नेशनल कॉन्फ्रेंस) को गुरुवार को रिहा कर दिया गया। साथ ही आज से पर्यटकों को राज्य में आने की अनुमति दे दी गई है।

‘कश्मीरियों को तो चारा मानते हैं’

महबूबा की ओर से बेटी इल्तिजा ने गुरुवार को ट्वीट किया- सच्चाई यह है कि कश्मीरियों को तोपों का चारा माना जाता है। घाटी में अशांति फैलाने के लिए सेना को मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जाता है। सत्तारूढ़ दल को न तो जवानों और न ही कश्मीरियों की कोई चिंता है। उन्हें सिर्फ चुनाव जीतने की चिंता है।

एडवाइजरी वापस ली गई

राज्य से अनुच्छेद 370 हटने के बाद पर्यटकों के यहां आने पर पाबंदी लगा दी गई थी। लेकिन सरकार ने कश्मीर में स्थिति को सामान्य होता देख एडवाइजरी वापस ले ली। अब पर्यटक घाटी में घूमने जा सकेंगे। उन्हें पूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

पहले भी रिहा किए थे दो नेता

इससे पहले 21 सितंबर को प्रशासन ने पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेताओं इमरान अंसारी और सैयद अखून को स्वास्थ्य कारणों के आधार पर रिहा किया था। 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लिए जाने के बाद से ही राज्य में हजार से ज्यादा लोगों को निगरानी में रखा गया है। इन लोगों में राजनीतिज्ञ, अलगाववादी, सामाजिक कार्यकर्ता और वकील शामिल हैं।

राज्य से बाहर भेजे गए 250 से ज्यादा लोग

निगरानी में रखे गए लोगों में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं। इस दौरान 250 से ज्यादा लोगों को राज्य के बाहर स्थित जेलों में भेजा गया है। फारूक को नागरिक सुरक्षा कानून के तहत निगरानी में रखा गया है, वहीं अन्य राजनेताओं को अलग-अलग धाराओं के तहत हिरासत में रखा गया है।