महबूबा ने कहा- 35ए से छेड़छाड़ बारूद को हाथ लगाने जैसा, पूरा जिस्म राख हो जाएगा


जम्मू-कश्मीर में 10 हजार अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती और अनुच्छेद 35ए हटाने की खबरों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। रविवार को उन्होंने कहा कि 35ए के साथ छेड़छाड़ करना बारूद को हाथ लगाने जैसा होगा। इसके लिए जो हाथ उठेगा वो हाथ नहीं पूरा जिस्म जलकर राख हो जाएगा। दरअसल, सरकारी सूत्र ने दावा किया कि राज्य में अनुच्छेद 35ए हटाने के बाद की स्थिति से निपटने के लिए जवान कश्मीर भेजे जा रहे हैं।

मोदी सरकार ने शनिवार को कश्मीर में अर्धसैनिक बलाें के 10 हजार अतिरिक्त जवान तैनात करने का फैसला किया था। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के दो दिन के जम्मू-कश्मीर दाैरे के बाद यह खबर आई थी। गृह मंत्रालय के अनुसार यह तैनाती आतंकवाद विराेधी ग्रिड मजबूत करने, पाक के आतंकी हमलों के खतरों से निपटने और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए की जा रही है। अर्द्धसैनिक बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियाें में 50 सीआरपीएफ, 30 सशस्त्र सीमा बल और 10-10 बीएसएफ और आईटीबीपी की हाेंगी। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया कि यह जवान उत्तरी-कश्मीर में तैनात हाेंगे।

सरकार 35ए हटाने की तैयारी में: सूत्र
केंद्र सरकार में उच्च पदस्थ सूत्र ने दावा किया कि राज्य में विवादित अनुच्छेद 35ए हटाने की उल्टी गिनती शुरू हाे चुकी है। इसे हटाने के बाद के हालात से निपटने के लिए अतिरिक्त जवान भेजे जा रहे हैं। सूत्राें ने कहा कि अनुच्छेद-35ए हटाने के विरोध की आड़ में राष्ट्र विरोधी तत्व हिंसा फैला सकते हैं। ऐसे लाेगाें की सूची भी तैयार है। इन्हें एहतियात के ताैर पर हिरासत में रखा जाएगा। इस सूची में अलगाववादियाें के साथ ही कुछ स्थानीय राजनेता भी शामिल हैं। अनुच्छेद हटाने के बाद बनने वाले हालात से निपटने के ऑपरेशन को नाम भी दिया जा चुका है।

सैन्य ताकत से कश्मीर का मुद्दा हल नहीं होगा: महबूबा
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सरकार के इस फैसले पर भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि कश्मीर की समस्या राजनीतिक है। यह मुद्दा सैन्य ताकत से नहीं सुलझाया जा सकता है। घाटी में 10 हजार अाैर जवान तैनात करने से लोगों के मन में भय पैदा हो रहा है। कश्मीर में सुरक्षाबलों की कमी नहीं है। सरकार को दोबारा सोचने और अपनी नीति बदलने की जरूरत है।

अनुच्छेद 35ए के तहत मिलती है पूर्ण नागरिकता
अनुच्छेद-35ए धारा 370 का एक हिस्सा है, जो कश्मीर के लोगों को विशेष अधिकार देता है। इस अनुच्छेद के तहत जम्मू-कश्मीर सरकार राज्य के नागरिकों को पूर्ण नागरिकता प्रदान करती है। राज्य के बाहर का कोई भी व्यक्ति यहां किसी प्रकार की संपत्ति नहीं खरीद सकता है। यहां की महिला से शादी के बाद उसकी संपत्ति पर अपना हक भी नहीं जमा सकता है। इस कानून को लेकर लंबे समय से विवाद है और इस पर कई तरह की बयानबाजियां होती रही हैं।