एमजीएसयू मेें हुई ‘मायड़भासा री ओलखाण’, राजस्थानी विभाग का हुआ शुुुुभारंंभ


बीकानेर। राजस्थानी भाषा और संस्कृति अपनी विशिष्टता के कारण पूरे देश में अलग पहचान रखती है। शालीनता, सभ्यता और अपनेपन की इस भाषा को संवैधानिक मान्यता देना समय की ज़रूरत है। एमजीएसयू ने इसी पुनीत प्रयास में सहयोग के लिए अपने यहां राजस्थानी विभाग खोला है। विवि के कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह ने यह बात महर्षि वशिष्ठ भवन सभागार में राजस्थानी विषय के शुभारंभ समारोह में कही। ‘मायड़भासा री ओलखाण ‘ आयोजन को संबोधित करते प्रो. भगीरथ सिंह ने कहा कि शीघ्र ही इसे पूर्ण विभाग के रूप में स्थापित किया जाऐगा। उन्होंने कहा कि इस विषय का पाठ्यक्रम साहित्यकारों, समाज शास्त्रियों व शिक्षकों के सहयोग से तैयार किया जाऐगा। कुलपति ने समारोह में विश्वविद्यालय से पीएचडी राजस्थानी में प्रारंभ करने व इस के लिए छः सीट अलाॅट होने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने राजस्थानी का एक पुस्तकालयतैयार करने व उदयपुर, जोधपुर व बीकानेर विश्वविद्यालयों के राजस्थानी विभागों का अकादमियों से जुड़कर संगोष्ठीयां आयोजित करने का सुझाव भी मंच से दिया। उन्होंने राजस्थानी को आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने के लिए तीनों विश्वविद्यालयों का एक संयुक्त पत्र भी सरकार को लिखने की बात कही। इससे पूर्व राजस्थानी विभाग की प्रभारी डॉ. मेघना शर्मा ने समारोह का संयोजन करते हुए मंच से राजस्थानी कविता के माध्यम से अतिथियों का स्वागत किया।
मुख्य अतिथि राजस्थानी भाषा परामर्श मण्डल के संयोजक श्री मधु  आचार्य ‘ आशावादी ‘ ने कहा कि बीकानेर विश्वविद्यालय में राजस्थानी विभाग आरंभ होना एतिहासिक घटना है। अब भाषा की मान्यता के आंदोलन को युवाओं का साथ मिलेगा। राजस्थानी की मान्यता का लाभ साहित्यकारों को ही नहीं हर घर को लाभान्वित करेगी । विश्वविद्यालय के राजस्थानी विभाग को साहित्य जगत की तरफ से पूरे सहयोग का भरोसा उन्होंने मंच से दिलाया। विशिष्ट अतिथि डाॅ. मंगत बादल ने राजस्थानी को जीवन की भाषा बताया व चिंता जताई कि मान्यता न मिलने के कारण हमारी संस्कृति विलुप्त हो रही है। समाज विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. नारायण सिंह राव ने इसे कुलपति का राजस्थानी भाषा विकास व मान्यता की दिशा में महती कदम बताया। समारोह में सविता चांवरिया द्वारा ‘केसरिया बालम आवो ‘ पर नृत्य प्रस्तुत किया गया। सूर्य प्रकाशन मंदिर के डाॅ. प्रशांत बिस्सा ने विभाग को प्रारंभ में एक सौ एक व बाद में सहायता हेतु निशुल्क राजस्थानी पुस्तकें भेंट करने की घोषणा की।  धन्यवाद ज्ञापन काॅलेज निदेशालय के डाॅ. दिग्विजय सिंह ने दिया। समारोह में डाॅ. प्रकाश अमरावत,  बुलाकी शर्मा,  देवकिशन राजपुरोहित,  राजेंद्र जोशी, प्रो. अनिल कुमार छंगाणी,  प्रो. राजाराम चोयल, मदन सैनी, डाॅ. प्रशांत बिस्सा,  विकास पारीक, सप्रेम जोशी, हरीश. बी. शर्मा,  नगेन्द्र किराडु, डाॅ. प्रभुदान चारण, डाॅ. अभिषेक वशिष्ठ,  डाॅ. धर्मेश हरवानी, ज्योति लखाणी,  डाॅ. नमामि शंकर आचार्य,  डाॅ. गौरीशंकर प्रजापत पृथ्वी राज रत्नू, डाॅ. शशि वर्मा, डाॅ. सीमा शर्मा व  नितिन गोयल के अलावा शहर के गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे ।