मुंबई के विशाल ने बनाई बाल गणेश की थीम बेस्ड 350 मूर्तियां, महीनों पहले बुकिंग


यूं तो मुंबई में हजारों कलाकार हैं, जो गणपति की मूर्तियां बनाते हैं, लेकिन उन सब में अलग पहचान वाला एक कलाकार है। मूर्तिकार विशाल शिंदे ने गणपति को अलग रूप दिया है। भगवान विघ्नहर्ता के बाल रूप की प्रतिमाएं जो सोशल मीडिया पर छा जाती हैं, वे ज्यादातर विशाल की बनाई ही होती हैं। पिता से विरासत में मिली मूर्तिकला को विशाल ने ऐसा रंग दिया कि न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया के कई देश जैसे ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा से मूर्तियों के ऑर्डर आते हैं। विशाल के बनाए बाल गणेश की दुनिया में कितनी डिमांड है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 6 महीने पहले से उन्हें लोग मूर्ति के लिए बुकिंग दे देते हैं।

मुंबई के सर जेजे आर्ट कॉलेज से ग्रेजुएट 39 साल के विशाल शिंदे को मूर्तिकला विरासत में मिली। उनके पिता सूर्यकांत शिंदे भी लंबे अरसे से मूर्ति बनाने के काम में हैं। विशाल का बचपन मूर्तियों के ईर्द-गिर्द ही गुजरा है। कुछ साल पहले कुछ नया करने की ललक ने उन्हें बाल गणेश की प्रतिमाओं का प्रयोग करने की प्रेरणा दी। बकौल विशाल ज्यादातर लोग घरों में ऐसी प्रतिमाएं रखते हैं जो आशीर्वाद देने की मुद्रा में होती हैं। उनमें ज्यादा कुछ क्रिएटिव नहीं होता। बाल गणेश का आइडिया उन्हें इसलिए आया कि इसे लेकर बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक में आकर्षण होता है। ये मूर्तियां लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट लाती हैं। लोग इन्हें अपने दिल के करीब महसूस करते हैं।

एक सीजन में 350 प्रतिमाएं
मुंबई के लोअर परेल में त्रिमूर्ति आर्ट स्टूडियो के नाम से विशाल अपनी मूर्तिकारी का काम करते हैं। एक गणपति उत्सव के दौरान वे 300 से 350 प्रतिमाएं बनाते हैं, जो बाल गणेश की थीम पर ही होती हैं। इसके अलावा उनकी सहयोगी टीम भी है। बाल गणेशा की प्रतिमाओं का काम 60 प्रतिमाओं की बुकिंग से शुरू हुआ था। इस साल 350 बुकिंग हैं।

हर मूर्ति कुछ ज्यादा समय लेती है 
विशाल हर बार एक सी प्रतिमाएं नहीं बनाते। उनकी कोशिश रहती है कि हर बार कुछ नया किया जाए। इस कारण उस थीम को सोचने और उसे पूरा करने में महीनों लग जाते हैं। मूर्ति के कच्चे स्कैच से लेकर सांचे में ढालने तक हफ्तों का समय लग जाता है। हर मूर्ति के एक्सप्रेशन पर विशेष काम किया जाता है। बाल गणेश की हर मूर्ति के चेहरे पर ऐसा लुक दिया जाता है, जिसमें मासूमियत और शरारत दोनों शामिल हों।

इस बार खास क्या?
इस बार की मूर्तियों में एक दूसरे को अपने शस्त्र दिखाते गणेश और कार्तिकेय, शंख की ध्वनि सुनते गणेश, कमल के पत्ते पर पड़ी पानी की बूंद में अपना चेहरा देखते गणेश, शतरंज खेलते हुए गणपति और कार्तिकेय, कार्तिकेय के मोर पर बैठे गणपति आदि प्रतिमाएं गणेश-कार्तिकेय ब्रदरहुड की थीम पर बनाई हैं।

सारी प्रतिमाएं ईको-फ्रेंडली होंगी
विशाल का कहना है प्रतिमाएं ऐसी होनी चाहिए, जो समुद्र या नदियों में विसर्जन के बाद कोई नुकसान न पहुंचाए। हम अपनी मूर्तियों के निर्माण के समय इस बात का ध्यान रखते हैं कि ये प्रकृति पर किसी तरह का नकारात्मक असर ना डालें। सभी प्रतिमाएं ईको-फ्रेंडली हैं। इनमें सारे रंग और सामग्रियां नेचुरल हैं। विसर्जन के बाद इनका कोई नकारात्मक प्रभाव समुद्र या नदियों पर नहीं होगा।

20 से 55 हजार तक है कीमत 
विशाल के मुताबिक साइज और डिजाइन के हिसाब से प्रतिमाओं की कीमत तय की जाती है। 20 से लेकर 55 हजार तक की प्रतिमाओं का निर्माण यहां किया जा रहा है जो लगभग सभी बुक हो चुकी हैं। इनमें से कुछ थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, लंदन और दुबई जैसे देशों मे भेजी जा रही हैं। विदेशों से बाल गणेश की प्रतिमाओं की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। मार्च से शुरू हुआ इन मूर्तियों का निर्माण अगस्त में फाइनल स्टैज पर आया है।