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मंदिर को 337 करोड़ का महादान, 34 सालों में 520 गुना बढ़ा भगवान का 'प्रॉफिट', नोट गिनने में 200 लोग जुटे

May 02, 2026 Super Admin 3
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मंदिर को 337 करोड़ का महादान, 34 सालों में 520 गुना बढ़ा भगवान का 'प्रॉफिट', नोट गिनने में 200 लोग जुटे

क्या आप यकीन करेंगे कि किसी जगह पर सिर्फ 34 सालों के अंदर आमदनी सीधे 520 गुना बढ़ जाए? शेयर बाजार या किसी बड़े से बड़े बिजनेस में भी ऐसा रिटर्न मिलना नामुमकिन सा लगता है. लेकिन राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित मेवाड़ के सुप्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में आस्था और चमत्कार का यही गणित चल रहा है. साल 1991-92 में जहां इस मंदिर का सालाना चढ़ावा 65 लाख रुपये था, वह अब 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक 337 करोड़ रुपये के पार जा पहुंचा है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस मंदिर में धन की इतनी अपार बारिश क्यों हो रही है और यहां की छोटी-छोटी मगर हैरान करने वाली बातें क्या हैं?

भगवान को 'बिजनेस पार्टनर' बनाते हैं व्यापारी

श्री सांवलिया सेठ के दरबार में आस्था का एक बहुत ही निराला पहलू देखने को मिलता है. देशभर से आने वाले व्यापारी और उद्यमी जब भी कोई नया काम या बिजनेस शुरू करते हैं, तो वे भगवान को अपना हिस्सेदार बना लेते हैं. वे अपने मुनाफे का एक फिक्स हिस्सा भगवान के नाम तय कर देते हैं. जब उनकी मनोकामना पूरी होती है और बिजनेस में छप्पर फाड़ कमाई होती है, तो भक्त खुशी-खुशी भगवान का हिस्सा मंदिर के भंडार में अर्पित कर देते हैं. यही कारण है कि जब भी दानपात्र खुलता है, तो उसमें सिर्फ नोट ही नहीं, बल्कि भारी मात्रा में सोने-चांदी के गहने और बेशकीमती वस्तुएं भी निकलती हैं.

खजाना खुलने के दिलचस्प नियम

दानपात्र खुलने और नोटों की गिनती का नजारा किसी रिजर्व बैंक से कम नहीं होता. वैसे तो भंडार हर महीने समय-समय पर खुलता है, लेकिन इसके कुछ खास नियम हैं. दीपावली पर पूरे दो महीने बाद और होली पर डेढ़ महीने के अंतराल पर भंडार को खोला जाता है. हाल ही में जब होली के अवसर पर डेढ़ महीने के गैप के बाद दानपात्र खोला गया, तो एक ही बार में 56 करोड़ रुपये से ज्यादा की दानराशि निकली थी. जो मासिक चढ़ावा पहले 28-29 करोड़ रुपये के आसपास रहता था, वह अब उछलकर 42 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है.

35 देशों के नोटों की गिनती में छूटते हैं पसीने

नोटों की गिनती करना इतना आसान नहीं है. इसके लिए 200 से अधिक कर्मचारियों को लगाया जाता है, तब जाकर 6 से 7 चरणों में पूरी दानराशि की गिनती हो पाती है. श्री सांवलिया सेठ की ख्याति अब वैश्विक स्तर पर फैल चुकी है. मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. दानपेटी खोलने पर भारतीय मुद्रा के अलावा 30-35 अलग-अलग देशों की विदेशी करेंसी भी बड़ी मात्रा में मिलती है. इस दौरान नोट, सोना-चांदी, शेयर सब चीजों की गिनती होती है और अंत में दान पात्र से निकली कुल राशि का फाइनल आंकड़ा जारी किया जाता है.

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