फर्जी काॅल सेंटर बना करते थे अाॅनलाइन ठगी, छह गिरफ्तार


बीकानेर. शहर की काेटगेट थाना पुलिस ने फर्जी काॅल सेंटर बना अाॅनलाइन ठगी करने वाले गिराेह के छह लाेगाें काे दिल्ली से गाेवा जाते एयरपाेर्ट पर गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने बीकानेर में रहने वाले युवक के क्रेडिट कार्ड से 1.40 लाख रुपए निकाले थे, पुलिस साइबर तकनीक से पता लगाकर उन तक पहुंच गई। बीकानेर के खजांची माेहल्ले में रहने वाले देवांश अग्रवाल के क्रेडिट कार्ड का बिल ज्यादा जिसका सेटलमेंट करवाने के लिए उसने शिकायत कर रखी थी। ठगाें ने इसकी जानकारी जुटा उसे सेटलमेंट करवाने का झांसा देकर अाेटीपी नंबर हासिल कर क्रेडिट कार्ड से दाे बार 80 हजार अाैर 60 हजार रुपए निकाल लिए थे। काेटगेट थाने के एसएचअाे धरम पूनिया ने बताया कि छानबीन की गई ताे सामने अाया कि दिल्ली के लाेगाें का एक गिराेह है जिसने चलता-फिरता फर्जी काॅल सेंटर बना रखा है अाैर कंपनियाें, बैंकाें से जानकारी हासिल कर उपभाेक्ताअाें से अाॅनलाइन ठगी करते हैं। अभियुक्ताें की गिरफ्तारी के लिए एक टीम काे दिल्ली भेजा गया। रविवार काे गिराेह के छह सदस्य गाेवा जाने के लिए दिल्ली एयरपाेर्ट पहुंचे। वहां की पुलिस अाैर सीअाईएसएफ के सहयाेग से एयरपाेर्ट पर दिल्ली निवासी माे.राजा, माेहम्मद अालम, धीरज साेनी, समीर, माे. नाजिम अाैर यूपी में बागपत जिला निवासी प्रिंस चाैहान काे दबाेच लिया। इन अभियुक्ताें काे मंगलवार काे काेर्ट में पेश किया जाएगा।

20 खाते, डेढ़ माह में 50 लाख से ज्यादा की ठगी
अभियुक्ताें के करीब 20 खाते हैं जिनमें डेढ़ माह के दाैरान ही 50 लाख रुपए से ज्यादा की राशि का ट्रांजेक्शन हुअा है। दाे खाताें की जानकारी जुटाई गई हैं जिनमें से एक में 11 अाैर दूसरे खाते में सात लाख रुपए जमा हुए हैं। अभियुक्त पिछले दिनाें मुंबई, शिमला, चंडीगढ़, पंचकुला, सहित अनेक स्थानाें पर गए अाैर हाेटलाें में रुककर अाईवीअारएस सेवा इस्तेमाल कर अाॅनलाइन ठगी की।

इस तरह करते थे ठगी
अभियुक्त कस्टमर केयर काॅल सेंटराें से प्राप्त डाटा के अाधार पर क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेशन व सटलमेंट के नाम पर उपभाेक्ताअाें काे फाेन कर झांसे में लेते हैं। इसके लिए वे अाईवीअारएस सेवा का उपयाेग करते हैं जिससे लगे कि टाेल फ्री नंबर से काॅल अाया है। इसके बाद झांसे में लेकर वे पेयू, पीटीएम, फाेनपे जैसी साइटाें पर फर्जी मर्चेंट अाईडी बना उपभाेक्ता से अाेटीपी नंबर हासिल कर रुपए निकाल लेते हैं।

ठगे गए रुपए विड्राेल करने से पहले अलग-अलग खाताें पर ट्रांसफर करते हैं जिससे कि उपभाेक्ता व पुलिस रुपयाें काे ब्लाॅक ना करवा सके।