प्रदेश के 10 हजार स्कूलों में कंप्यूटर लैब पर कंप्यूटर शिक्षकों के पद स्वीकृत नहीं

प्रधानमंत्री एक तरफ डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने में लगे हैं, दूसरी तरफ प्रदेश में कंप्यूटर शिक्षा की पढ़ाई के शिक्षक ही नहीं हंै। सरकार ने दस हजार स्कूलों में कंप्यूटर लैब तो बना दिए लेकिन एक भी शिक्षक का पद स्वीकृत नहीं किया। इससे कंप्यूटर की पढ़ाई भगवान भरोसे चल रही है। 25 हजार से अधिक कंप्यूटर शिक्षक बेरोजगार हंै। वे भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। भाजपा सरकार ने केंद्र के सहयोग से कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती का एलान किया था, लेकिन पांच साल में भी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। अब सरकार ने भर्ती की फाइल वित्त विभाग में भेजी है। बेरोजगार कंप्यूटर शिक्षक वित्त विभाग से स्वीकृति मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

नवीं और दसवीं में तो कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य है। कला शिक्षा की तरह इसमें भी फर्जी तरीके से अंक देकर खानापूर्ति की जा रही है। पहले सरकार ने संविदा कंप्यूटर शिक्षक लगा रखे थे, लेकिन सरकार ने इन शिक्षकों को पिछले साल हटा दिया था। तब से ही वे शिक्षक तो वापस लगने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और कंप्यूटर योग्यताधारी सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षकों के पद सृजित कर भर्ती की मांग कर रहे हैं।

शिक्षकों के अभाव में सफल नहीं हो पाए यह प्रयास 
सरकार ने केंद्र के सहयोग से सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) योजना के तहत स्कूलों में कंप्यूटर लैब स्थापित की थी।  इसमें 75 फीसदी केंद्र का व 25 फीसदी राज्य का सहयोग था। शुरुआत में संविदा पर कंप्यूटर अनुदेशक लगाए गए, लेकिन बाद में इनको हटा दिया गया। इसके अलावा राज्य बजट से कंप्यूटर शिक्षा के लिए 1172 स्कूलों में क्लिक योजना चलाई गई। कंप्यूटर शिक्षकों के अभाव में यह योजना भी दम तोड़ गई।

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