घाेटाले उजागर करने वाले ऑडिट विभाग काे खत्म करने की तैयारी में राजस्थान सरकार


सरकारी दफ्तरों में घोटाले उजागर करने वाले ऑडिट महकमे को सरकार खत्म करने की तैयारी में है। वित्त अंकेक्षण विभाग के अधीन आने वाला इंटरनल ऑडिट एंड फिजिकल वेरिफिकेशन विभाग प्रदेश के 17 हजार सरकारी दफ्तरों के ऑडिट पैरा बनाता है। इसे खत्म करने की कवायद कंसल्टेंसी कंपनी ई एंड वाय की रिपोर्ट को आधार बनाकर की जा रही है।

पिछली भाजपा सरकार ने ऑडिट संस्थानों को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए प्रोजेक्ट चलाया था। इसके तहत विभागों के कामों की समीक्षा के लिए ई एंड वाय कंपनी को ठेका दिया था। 10 अप्रैल को प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक के बाद सरकार को रिपोर्ट सौंपी। इसमें ऑडिट विभाग के पदों को समाप्त करने और संबंधित विभाग के अधिकारियों से ही ऑडिट करवाने का प्रस्ताव रखा है। अंकेषण विभाग के निदेशक एसके असवाल ने कहा कि हमने रिकॉर्ड पर अपनी राय रख दी। इससे ज्यादा कुछ नहीं बता सकता।

निरीक्षण विभाग की आपत्ति दरकिनार
ई एंड वाय की रिपाेर्ट के आधार पर ऑडिट विभाग काे समाप्त करने के प्रस्ताव को आगे बढ़ाते हुए निरीक्षण विभाग से राय मांगी। निरीक्षण विभाग ने आपत्ति जताई। लेकिन वित्त विभाग ने इसे दरकिनार करते हुए पद समाप्त करने के आदेश निकाल दिए। वित्त विभाग का कहना है कि सरकारी विभागों में ऑडिट का काम वहां के वित्तीय सलाहकार और वरिष्ठ लेखाधिकारी कर सकते हैं। इंटरनल ऑडिट को सिर्फ निकायों और पंचायतों तक ही रखा जाना चाहिए।

243 पद, 17 हजार ऑफिसों का जिम्मा
वित्त वर्ष 2018-19 में ऑडिट विभाग में कुल 81 टीमों के लिए 243 पद हैं। इनमें से हर टीम में एक भौतिक सत्यापन अधिकारी, एक कनिष्ठ लेखाकार और एक सहायक लेखाधिकारी शामिल होता है। निरीक्षण विभाग की फिजिकल वेरिफिकेशन टीमें हर साल प्रदेश के 17 हजार दफ्तरों का भौतिक सत्यापन करती है। ऑडिट विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि हर साल यह विभाग करोड़ों रुपए की गड़बड़ियों के पैरा बनाता है। विधानसभा की कमेटी में सरकार को इन पैरा को लेकर जवाब देना पड़ता है। यदि यह विभाग खत्म होता है तो इसकी तरफ से जो ऑडिट पैराज बनाए गए हैं उनकी रिकवरी संभव नहीं हो सकेगी। इसके 34542 ऑडिट पैराज अब तक सरकार पर बकाया हैं। पिछले वित्त वर्ष में ऑडिट महकमे ने सरकारी विभागों में 16 करोड़ की सरकारी संपत्तियों की चोरी और गबन के ऑडिट पैरा बनाए थे।