राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने तंबाकू के कारोबार पर रोक लगाने की सिफारिश की

Rajasthan Human Rights Commission: राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने देश में तंबाकू की खेती से लेकर इसके संपूर्ण कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश करते हुए कहा है कि इसका उल्लंघन करने पर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए। आयोग ने कहा है कि हजारों करोड़ के राजस्व के लिए किसी को कैंसर के बीज बेचने की इजाज नहीं दी जा सकती। आयोग ने अपनी सिफारिशेें केंद्र सरकार को भेजी हैं।

राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया की एकल पीठ ने तंबाकू कारोबार पर पूर्ण प्रतिबंध के विषय में सभी संबंधित पक्षकारों का पक्ष जानने के बाद यह सिफारिशें की हैं। आयोग ने माना है कि तंबाकू उत्पादों पर रोक लगाने के बारे में लागू कानून पालना के स्तर पर पूरी विफल रहे है। यही कारण है कि आज देश के हर गली मोहल्ले में तंबाकू आसानी से उपलब्ध है। आयोग ने कहा है कि पूरी दुनिया में हर वर्ष 80 लाख लोग तंबाकू के कारण मरते हैं ओर इनमें से 12 लाख ऐसे भी हैं, जो तंबाकू का सेवन नहीं करते, लेकिन इसके दुष्प्रभावों से इनकी मौत होती है। तंबाकू के कारण कैंसर जैसा रोग होता है और व्यक्ति तड़प-तड़प कर मरता है।

आयोग ने कहा है कि एक तरफ तो सरकार सेंट्रल टोबेको रिसर्च इंस्टीट्यूट तंबाकू की नई-नई किस्में ला रहा है और वही सरकार दावा कर रही है कि हम लोगों को तंबाकू सेवन से बचने की सलाह दे रहे हैं ओर लोगों को तंबाकू से बचाने का प्रयास कर रहे हैैं। आयोग ने माना है कि तंबाकू पर प्रतिबंध के लिए सरकार ने बेहद कमजोर कानून बनाए हैं और इसी के चलते भारत दुनिया में तंबाकू उत्पादन में पहले तीन देशों में शामिल है। आयोग ने कहा है कि सरकार द्वारा तंबाकू उत्पादों पर नियंत्रण के लिए बनाए गए “कोटपा“ कानून के लागू होनेे के बाद बीडी- सिगरेट के उत्पादन या बिक्री में कमी आने का कोई प्रमाण नहीं है। आयोग ने कहा है कि तंबाकू कारोबार के बारे में तंबाकू उत्पाद बनाने वाली कंपनियां बेरोजगारी बढ़ने, बेरोजगारों के आतंकी या नक्सली बनने जैसे तर्क देते हैं, लेकिन आयोग इन तर्कों को नहीं मानता।

आयोग ने की यें सिफारिशें

– तंबाकू की खेती और इसके सभी तरह के व्यापार पर प्रतिबंध लगाना भारत सरकार का संवैधानिक दायित्व है।

– कोटपा कानून के प्रावधानों में भारी कमियां हैं। ऐसे में मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इससे भारत के राज्यों में मानवाधिकार का हनन ही नहीं बल्कि मानव जीवन की हानि हो रही है।

-सरकार तंबाकू उत्पादों से होने वाली आय को महत्व देती है तो उसे तंबाकू से होने वाली बीमारियों के उपचार पर सरकार और आम जनता द्वारा किए जाने वाले खर्च की गणना भी करनी चाहिए और उस खर्च को भी देखना चाहिए, जो बचाव के लिए प्रचार प्रसार पर किया जा रहा है।

– केंद्र सरकार कोटपा कानून को हटा कर तंबाकू की खेती से लेकर उत्पादों के व्यापार व सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए।

– राज्य सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखे।

– तंबाकू की खेती से लेकर इसके उत्पादों के उयोग को दंडनीय अपराध घोषित किया जाए।

– ऐसे उत्पादों के कारोबार पर आजीवन कारावास के दंड का प्रावधान किया जाए।

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