संत श्री रामदास जी महाराज बापजी जयसियाराम आश्रम पुनासर वालो ने अपने बत्तीस वर्ष के आध्यात्मिक अनुसंधान से प्राप्त ज्ञान का अनुभव

संत श्री रामदास जी महाराज बापजी जयसियाराम आश्रम पुनासर वालो ने अपने बत्तीस वर्ष के आध्यात्मिक अनुसंधान से प्राप्त ज्ञान का अनुभव आम लोगों के जीवन में खुशहाली सामर्थ्य, संस्कार मय समाज को बढावा मिले।
हमारे सवाल संत श्री रामदास जी महाराज बापजी के जबाब :-
●नववर्ष से जीवन में करें बदलाव घर का वास्तु करें सकारात्मक।
● सकारात्मक मुर्तियों व तस्वीरों की घर में करें पुजा।
●देवताओं को करें प्रसंन्न घर में होगी खुशहाली।
● प्रकृति की नियमों की पालना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार।
नव वर्ष में सुखी सकारात्मक जीवन जीने के लिए तीन चीजों को सकारात्मक रखना जरूरी है , पहला निवास स्थान का वास्तु सकारात्मक होना चाहिए सकारात्मक वास्तु के लिए अग्नि कोण में रसोई होनी चाहिए अगर संभव नहीं हो तो वायव्य कोण में भी कर सकते हैं , नैऋत कोण में गृह स्वामी का निवास रहना चाहिए , वायव्य कोण में मेहमान कक्ष , रसोई , अनाज जो नित्य काम की वस्तु हों उनका भंडार , पशु पालन होना चाहिए , इशान कोण में पानी का टांका , पूजा घर , बच्चों के पढ़ने का स्थान होनाचाहिए ओर इसान में वजन नही रखना चाहिए इसके अलावा कोइ छोटा मोटा दोष हो तो घर के मैंन गेट व कमरे के द्वार उपर बाहर की तरफ पोने सात इंच का स्वास्तिक गाय के घी सिंदूर से बनादें एवं मुख्य द्वार पर बाहर की तरफ स्वास्तिक , 978 , और हनुमानजी की एक फोटो या मूर्ति लगाने से वास्तु दोष नहीं होता गणेशजी लगाएं तो दो लगाने चाहिए एक का मुख बाहर एक का अंदर की तरफ हो , ध्यान रहे मूर्तियां जो भी लगाएं सकारात्मक लगाएं इसका जीवन पर 15% प्रभाव रहता है । दूसरी ध्यान रखने की बात हैं कि चाहे जिस देवी देवता की पूजा करें उनकी मूर्ति या फोटू जो भी हो वो सही सकारात्मक , पोजेटिव होनी चाहिए जो वर्तमान में मंदिरों में घरों में अधिकांश नकारात्मक , नेगेटिव हैं एवं पूजा में जो भी मंत्र ,स्तुति ,पाठ करें वो सही हों तथा उनका अर्थ समझ में आना जरूरी है इसका जीवन पर 35% प्रभाव रहता है । तीसरा ध्यान रखने योग्य बात यह है कि घर में पितृ दोष नहीं हो यानि पूर्वज प्रशन्न रहें , (वर्तमान में अधिकांश घरों में पितृ दोष है ) इनका जीवन पर 50% प्रभाव रहता है इसलिए अगर सुखी जीवन जीने के लिए तीनों प्रणाली सही हैं तो उसका प्रकृति की सकारात्मक उर्जा सें संबंध होने के कारण कोई परेशानी नहीं हो सकती यह सनातन हिन्दू धर्म की प्रणाली है।

{ 2 } जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार केसे कि या जा सकता है –

● संत श्री रामदास जी महाराज बापजी:- आपका प्रश्न बहुत अच्छा है वर्तमान में विश्व में हर जगह अशांति होने का मुख्य कारण यह है कि इस संसार का उत्पत्ती कर्ता Generator , संचालन ( पालन ) कर्ता Opretor और संहार कर्ता Destroyer तो प्रकृति है लेकिन भूलवश या अज्ञानतावश मनुष्य प्रकृति की बजाय अपने आपको ही कर्ता मान रहा है चाहे धर्मगुरु हैं या राजकरण वाले हैं एवं चाहे साधारण मानव है यही भूल सर्वत्र अशांति का मूल कारण है ।

अब प्रकृति क्या है इस पर विचार करना चाहिए , गीता जी के सातवें अध्याय के चोथे श्लोक से भगवान श्रीकृष्ण जी ने अर्जुन जी के माध्यम से स्पष्ट समझाया है कि मेरी प्रकृति आठ जड़ तत्वों से बनी है भूमि , जल , अग्नि , वायु , आकाश , मन , बुद्धि , अहंकार ये तो मेरी जड़ प्रकृति है दूसरी चेतन प्रकृति है ये दोनों मिल कर इस ब्रह्माण्ड के समस्त प्राणियों का संचालन करती हैं ऐसा कोई भी प्राणी नहीं है जो प्रकृति से विरुद्ध कुछ कर सके । इस प्रकृति को विश्व के समस्त मनुष्य अलग अलग नाम रुपों से मान रहे हैं ।
अब हम केवल सनातन धर्म प्रणाली की बात करते हैं हम प्रकृति के आठ मूल तत्वों को क्रम से आठ देवताओं के रुप में मान रहे हैं पूर्वज पितृ देवता , कुलदेवता , स्थानदेवता , ग्रामदेवता , इष्टदेवता , पुरुष रुप में विष्णुजी स्त्री रुपमें लक्ष्मीजी , पुरुष रुप में ब्रह्माजी स्त्री रुपमें सरस्वतीजी , पुरुष रुप में महेशजी स्त्री रुप में कालीकाजी , बाकी सब इन्हीं के अलग अलग अंश रुप हैं , प्रकृति को ही इन रुपों में मंत्रों , स्तुति , पाठों द्वारा पूजा करके उर्जा उत्पन्न करते हैं उस उर्जा के द्वारा प्रकृति सारा संचालन कररही है तीन तरीकों से उर्जा उत्पन्न होती है क्योंकि ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति तीन तत्वों ( गुणों ) से है इसलिए उर्जा तीन तरीकों से ही उत्पन्न होती है एक शब्द ( मंत्र , स्तुति , पाठ आदि ) दूसरा स्वरूप ( मूर्ति , चित्र फोटू आदि ) तीसरा श्रद्धा से उर्जा उत्पन्न होती है चाहे भौतिक विज्ञान हो चाहे अध्यात्म विज्ञान हो सभी का संचालन तीन प्रणाली से ही है इसको मोबाइल के संचालन विज्ञान से आसानी से समझा जा सकता है जिसको वर्तमान में सभी जानते हैं , एक मोबाइल यंत्र यानि स्वरूप मूर्ति आदि , दूसरी सिम यानि शब्द मंत्र आदि , तीसरी बैटरी , पावर , करंट यानि श्रद्धा , विश्वास । उर्जा तीन प्रकार की होती है सकारात्मक उर्जा , नकारात्मक उर्जा , नपुंसक उर्जा , इनमें सकारात्मक , नकारात्मक दो ही मुख्य हैं , अगर मूर्ति स्वरूप , मंत्र स्तुति पाठ सही हैं सकारात्मक हैं श्रद्धा से करते हैं तो सकारात्मक उर्जा पैदा होती है अगर एक भी चीज गलत है तो नकारात्मक उर्जा पैदा होती है जैसे मोबाइल सिम या करंट एक भी गलत होने पर बात नहीं होती नकारात्मक होजाता है ऐसे ही पूजा में एक भी चीज गलत होने पर नकारात्मक उर्जा ही पैदा होती है।
●यज्ञ से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता हैं :-
आदी काल से सनातन धर्म की संस्कृति मैं पूजा यज्ञ अनुष्ठान की परंपरा रही है देवता व भगवान भी शक्ति प्राप्ति हेतु यज्ञ हवन किया करते थे। राजा महाराजा भी योग्य विद्वान ब्राह्मणों से सुख सामर्थ्य के लिए यज्ञ करवाते थे।क्योंकि सबसे ज्यादा उर्जा यज्ञ से होती है वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जिस वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा वहां मन,विचार, बुद्धि सकारात्मक होगी। क्योंकि वातावरण का ही प्रभाव मनुष्य प्राणी मात्र पर सीधा होता है। यज्ञ में पांच चीजें सही होने पर सकारात्मक उर्जा पैदा होती है एक , जिस देवी देवता का यज्ञ हो उसके सकारात्मक स्वरूप के सामने उनके निश्चित मंत्र जप होने चाहिए अगर गायत्री यज्ञ हो तो मंत्र जप केवल बिना किसी भी प्रकार का नशा नहीं करने वाले ब्राह्मणों से ही जप कराना चाहिए , जपे नैव तु संसिद्धदेद् ब्राह्मणो ना$त्र शंसय , गायत्री छंद साम्यहम् । ऐसा शास्त्र वचन है , दूसरा जप का दशांश यानि दस प्रतिशत हवन होना चाहिए , तीसरा हवन का दशांश तर्पण होना चाहिए , चोथा तर्पण का दशांश मार्जन होना चाहिए , मार्जन का दशांश ब्राह्मण भोजन होना चाहिए यह पांच प्रक्रिया हवन की हैं इनमें एक भी गलत होने पर यज्ञ से नकारात्मक उर्जा ही उत्पन्न होती है वर्तमान में होने वाले यज्ञ शायद ही एक प्रतिशत यज्ञ भी पांच प्रक्रियाओं के होते होंगे। नकारात्मक उर्जा पैदा होने का यह भी बहुत बड़ा कारण है।

वर्त्तमान समय में अधिकांश देवी देवताओं की मूर्तियां , फोटो नकारात्मक हैं। जिनकी मंदिरों में घरों में पूजा हो रही है बहुत सारे मंत्र स्तुति पाठ भी सही नहीं हैं जिसके कारण अधिकांश नकारात्मक उर्जा पैदा हो रही , नकारात्मक उर्जा का परिणाम प्रकृति नकारात्मक देती है सकारात्मक उर्जा का परिणाम प्रकृति सकारात्मक देती है। नकारात्मक उर्जा अधिक होने के कारण ही सर्वत्र अशांति है यही अशांति का मुख्य कारण है।
गुरुदेव सन्त श्री रामदास जी महाराज की कलम से।
अधिक जानकारी के लिए देखे।
www.vastupooja.org

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