शाह ने कहा- मातृभाषा पर हिंदी थोपने को नहीं कहा था, कोई राजनीति करना चाहे तो ये उसकी इच्छा


गृह मंत्री अमित शाह के एक राष्ट्र-एक भाषा के फॉर्मूला का दक्षिण भारतीय राज्यों में विरोध जारी है। इस बीच शाह ने अपने बयान पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मेरे बयान का मतलब किसी की मातृभाषा पर हिंदी को थोपना नहीं था। अगर कोई इस मसले पर राजनीति करना चाहता है, तो ये उसकी इच्छा है। गृह मंत्री ने कहा कि मैंने हिंदी को दूसरी भाषा के रूप में सीखने की अपील की थी। इससे पहले सुपर स्टार रजनीकांत ने कहा कि तमिलनाडु ही नहीं किसी भी दक्षिण राज्य में जबरन हिंदी या कोई अन्य भाषा नहीं थोपी जानी चाहिए।

रजनीकांत ने कहा- केवल भारत ही नहीं बल्कि किसी भी देश के लिए एक भाषा होना इसकी एकता और प्रगति के लिए अच्छा है। लेकिन, हमारे देश में जबरन कोई भी भाषा लागू नहीं की जा सकती है।
कमल हासन ने कहा था- जल्लीकट्टू से भी बड़ा आंदोलन होगा

इससे पहले कमल हासन ने भी कहा था कि 1950 में देशवासियों से वादा किया गया था कि उनकी भाषा और संस्कृति की रक्षा की जाएगी। कोई शाह, सम्राट या सुल्तान इस वादे को अचानक से खत्म नहीं कर सकता। उन्होंने वीडियो जारी कर कहा था कि भाषा को लेकर एक और आंदोलन होगा, जो तमिलनाडु में जल्लीकट्टू विरोध प्रदर्शन की तुलना में बहुत बड़ा होगा। हम सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन तमिल हमेशा हमारी मातृभाषा रहेगी।

कर्नाटक और बंगाल समेत कई राज्यों ने विरोध जताया

अमित शाह ने 14 सितंबर को कहा था कि हिंदी हमारी राजभाषा है। हमारे देश में कई भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन एक ऐसी भाषा होनी चाहिए जो दुनियाभर में देश की पहचान को आगे बढ़ाए और हिंदी में ये सभी खूबियां हैं। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और बंगाल के नेता पहले ही इस पर विरोध जता चुके हैं।