राम मंदिर में दिखेगी राजस्थान के पत्थरों की चमक

राममंदिर निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के दूसरे दिन रविवार को राजस्थान के सिकंदरा में नक्काशी करने वाले कारीगर छेनी और हथौड़ा लेकर अयोध्या जाने के लिए तैयार हो गए हैं। राजस्थान में दौसा जिले के सिकंदरा से 25 कारीगर अगले तीन दिन में अयोध्या के लिए रवाना होंगे। ये कारीगर अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर निर्माण के काम आने वाले पत्थरों पर नक्काशी करेंगे।

वैसे तो सिंकदरा में पिछले कई साल से राम मंदिर निर्माण के काम आने वाले जाली, झारोखों, तोरण द्वार और पिलर नक्काशी करके तैयार रखे हुए हैँ, लेकिन शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद यहां पत्थरों की नक्काशी का काम तेज हो गया। सिंकदरा से पत्थर पर नक्काशी करने वाले 25 कारीगर अयोध्या जाने को तैयार हैं। उधर, राजस्थान में ही सिरोही जिले के पिंडवाड़ा और भरतपुर के बंशी पहाड़पुर का पत्थर राम मंदिर में अपनी चमक दिखाएगा। बंशी पहाड़पुर का सफेद पत्थर और पिंडवाड़ा में पत्थर तराशी का काम करने वाले शिल्पकारों के चेहरों पर भी दो दिन से चमक नजर आ रही है।

सिकंदरा के कारीगरों ने एकत्रित किए औजार

पत्थर पर नक्काशी के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध दौसा जिले के सिंकदरा के कारीगरों ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही अपने औजार (छेनी, हथौड़ा, फावड़ा व फन्नी) संभाल लिए हैं। सिंकदरा स्टोन कारीगर एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी सैनी ने बताया कि वैसे तो यहां पिछले कई साल से राम मंदिर निर्माण के लिए झरोखों, जाली, पिलर और तोरणद्वार का निर्माण हो रहा था, लेकिन शनिवार से इस काम में तेजी आई है।

उन्होंने बताया कि करीब दो दशक पूर्व विहिप के नेता आचार्य गिरिराज किशोर ने यहां आकर हमारी कारीगरी देखी थी। इसके बाद हमें काम करने के लिए कहा गया। पहले काम धीरे चल रहा था, अब तेज गति से काम करेंगे। उन्होंने बताया कि सिंकदरा के 25 कारीगर पहले चरण में अयोध्या जाएंगे। सोमवार को इनके ट्रेन के टिकट बुक करा दिए जाएंगे। अगले चरण में मांग के अनुसार कारीगर भेज जाएंगे। यहां के सैंडस्टोन पत्थरों पर नक्काशी की मांग भारत ही नहीं बल्कि दुबई और आस्ट्रेलिया में भी है।

पिड़वाड़ा और बंशी पहाड़पुर के सफेद पत्थरों की तराशी फिर शुरू

सिरोही जिले के पिंडवाड़ा में पत्थर तराशी का काम करने वाले कारीगरों में शनिवार से खुशी का माहौल है। पिंडवाड़ा में पत्थर तराशी का काम करने वाले शिल्पकारों ने अब तक 250 ट्रक पत्थर तराशकर अयोध्या भेजे हैँ। साल 1996 से सिरोही जिले के पिंडवाडा, कोजरा और अजारी में पत्थर तराशी का काम शुरू किया गया था। उस समय विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल, आचार्य गिरिराज किशोर और नरपत सिंह शेखावत ने पिंडवाड़ा पहुंचकर यहां के शिल्पकारों की कारीगरी देखी थी और उसके बाद 250 ट्रक अयोध्या भेजे जा चुके हैँ। यहां की मातेश्वरी मार्बल, शिवशक्ति मॉर्बल और सोमपुरा मॉर्बल कंपनियों को पत्थर तराशकर अयोध्या भेजने का काम सौंपा गया था।

शिल्पकार नरेश लोहार ने बताया कि पिछले एक दशक से यहां पत्थर तराशी का काम तो धीमे स्तर पर चल रहा था, लेकिन अयोध्या नहीं भेजा जा रहा था। अब रविवार को फिर यहां के शिल्पकार सक्रिय हो गए। इसी तरह भरतपुर जिले में बंशी पहाड़पुर के सफेद और लाल पत्थरों की तराशी को निकालने और तराशने का काम करने वाले कारीगर रविवार को एक बार फिर सक्रिय हुए हैं। पिछले कुछ समय से यहां काम बिल्कुल बंद हो गया था। कारीगरों और ठेकेदारों ने राम मंदिर बनने की उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद रविवार से कारीगर फिर सक्रिय हो गए। यहां से पत्थर अयोध्या भेजने की जिम्मेदारी विश्व हिंदू परिषद के नेता संभालते हैं।

भरतपुर विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष मधुसूदन शर्मा ने बताया कि करीब तीन दशक पहले अशोक सिंघल और आचार्य गिरिराज किशोर ने यहां आकर पत्थर पंसद किए थे। उसके बाद से यहां पत्थर तराशने का काम शुरू हुआ था। यहां के खनन व्यवसायियों का कहना है कि बंशी पहाड़पुर के पत्थर की विशेषता है कि एक हजार साल तक इसमें कुछ नहीं होता,इनकी चमक बरकरार रहती है।

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