इस प्रकार से तुलसी का पौधा भी हो जाता है हानिकारक.



हिन्दू धर्म में शुभ-अशुभ का सिलसिला तो निरंतर लगा ही रहता है। हर छोटी-छोटी चीज में शुभ-अशुभ को माना जाता है। वंही अगर तुलसी के पौधे की बात की जाए, तो इसका धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व है। हर घर के आंगन में इसका होना जरूरी माना गया है। मान्यता है, कि जिस घर में तुलसी का पेड़ होता है, उस घर में नकारात्मक शक्ति प्रवेश नहीं कर पाती। इसके अलावा घर में लगा तुलसी का पौधा जहां सकारात्मक दृष्टि से अच्छा माना गया है, तो वहीं इसका नकारात्मक प्रभाव भी मानव जीवन पर पड़ता है। आज हम आपसे इसी तुलसी के पौधे के बारे में चर्चा करने वाले हैं, यहां पर हम जानेंगे कि आखिर वह कौन से कारण होते हैं, जिससे तुलसी का पौधा नकारात्मक प्रभाव देना शुरू कर देता है।

शास्त्रों के अनुसार तुलसी के पत्ते कुछ खास दिनों में नहीं तोडऩे चाहिए। ये दिन हैं एकादशी, रविवार और सूर्य या चंद्र गृहण काल। इन दिनों में और रात के समय तुलसी के पत्ते नहीं तोडऩे चाहिए। बिना उपयोग तुलसी के पत्ते कभी नहीं तोडऩे चाहिए। ऐसा करने पर व्यक्ति को दोष लगता है। अनावश्यक रूप से तुलसी के पत्ते तोडऩा, तुलसी को नष्ट करने के समान माना गया है। बेवजह तुलसी के पत्ते तोडऩे से मृत्यु का शाप लगता है।

तुलसी के पौधे को घर के अंदर नहीं लगाया जाता, ऐसा कहा जाता है कि तुलसी के पति के मृत्यु के बाद भगवान विष्णु ने तुलसी को अपनी प्रिये सखी राधा की तरह माना था। इसलिए तुलसी ने उनसे कहा कि वे उनके घर जाना चाहती हैं। लेकिन भगवान विष्णु ने उन्हें मना कर दिया और कहा कि मेरा घर लक्ष्मी के लिए है लेकिन मेरा दिल तम्हारे लिए है। तुलसी ने कहा कि घर के अंदर ना सही बाहर तो उन्हें स्थान मिल सकता है, जिसे भगवान विष्णु ने मान लिया। तब से आज तक तुलसी का पौधा घर और मंदिरों के बाहर लगाया जाता है।

तुलसी के पत्ते नहीं चबाने चाहिये तुलसी के पत्तों का सेवन करते समय ध्यान रखना चाहिए कि इन पत्तों को चबाए नहीं बल्कि निगल लेना चाहिए। इस प्रकार तुलसी का सेवन करने से कई रोगों में लाभ प्राप्त होता है। तुलसी के पत्तों में पारा धातु के तत्व होते हैं, जो कि पत्तों को चबाने से दांतों पर लग जाते हैं। जिससे आपके दांत खराब हो सकते हैं।