सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एएसआई की रिपोर्ट साधारण राय नहीं है, यह निष्कर्ष विकसित दिमागों ने निकाला था


सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अयोध्या में विवादित स्थान के बारे में पेश की गई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट किसी की साधारण राय नहीं है। कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद में सुनवाई करते हुए कहा कि 2003 में पेश हुई इस रिपोर्ट के लिए एएसआई की टीम इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशन में काम कर रही थी। एएसआई को खुदाई में प्राप्त वस्तुओं के आधार अपना दृष्टिकोण पेश करना था।

33वें दिन इस मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा- एएसआई की रिपोर्ट के निष्कर्ष शिक्षित और विकसित दिमागों ने निकाले थे।

मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी ने रिपोर्ट को ‘धारणा’ कहा था

बुधवार को मुस्लिम पक्ष की पैरवी कर रही वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने एएसआई की रिपोर्ट को “पुरातत्वविदों की धारणा” करार दिया था। अरोड़ा ने कहा था कि इस रिपोर्ट में जरूरी सबूत शामिल किए जाने चाहिए थे। इन सबूतों से ही अयोध्या के विवादित स्थान पर राम मंदिर की मौजूदगी साबित हो सकती थी।

कोर्ट की टिप्पणी के बाद मुस्लिम पक्ष ने यू-टर्न लिया था

अदालत ने बुधवार को हुए इस घटनाक्रम के बाद सख्त टिप्पणी की थी। गुरुवार को मुस्लिम पक्ष के वकील ने एएसआई की रिपोर्ट पर सवाल खड़े करने के मामले में यू-टर्न लिया था और अदालत से माफी भी मांगी थी। दरअसल अदालत ने इस मामले में दलीलें पेश करने के लिए 18 अक्टूबर तक समय निर्धारित किया है और अचानक नए मामले उठाए जाने को लेकर अदालत ने नाखुशी जताई थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 में दिए गए आदेश के खिलाफ, सर्वोच्च न्यायालय में 14 अपील दाखिल की गई हैं। 2.77 एकड़ जमीन के बंटवारे को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान के बीच ये मामला चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट में 5 सदस्यीय संविधान पीठ मामले की सुनवाई कर रही है। संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बबोडे, डीवाय चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।