बॉर्डर पर तापमान 50 डिग्री; फिर भी सीना ताने खड़े जवान, ताकि हम रहें सुरक्षित


राजस्थान से सटी पश्चिमी सीमा पर इन दिनाें सूरज का सितम चरम पर है। जैसलमेर के शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में ताे पारा 52 डिग्री काे भी पार कर गया है। आसमान से बरसती धूप ज्वालामुखी और कदमाें के नीचे की मिट्टी लावा सी उबल रही है। गश्त के दौरान सूर्य की भस्म करने वाली किरणें जवानों काे हर दिन भट्टी सा अहसास कराती हैं। स्वर्ण जैसी बालू रेत से आंखें चूंधिया जाती है।

ऐसे हालात में आम इंसान का 5 मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल है। वहीं बीएसएफ के जवान ऐसे हालातों में भी 6-6 घंटे पहरा देकर हमारी सुरक्षा कर रहे हैं। दाे माह से चल रहा ऐसा माैसम बारिश आने तक जारी रहेगा। लगातार पेट्रोलिंग करने वाले जवानों को हिट स्ट्रोक व लू से बचाने के लिए अब बीओपी में कूल रूम बनाए गए हैं तो पंखे वाले ओपी टॉवर्स का निर्माण भी जारी है।

पाकिस्तान से सटे इस क्षेत्र में 30 किमी रफ्तार से झुलसा देने वाली गर्म हवाएं चलती है। इन हवाओं से जूझते हुए बीएसएफ जवान 6-6 घंटे गश्त करते हैं। वे 2-2 के ग्रुप में 2 ओपी टॉवर के बीच करीब 1200 मीटर के फासले में लगातार चलकर गश्त करते हैं। पेट्रोलिंग शिफ्ट सुबह 6 बजे शुरू हाेती है, जो लगातार 24 घंटे तक जारी रहती है। 6 घंटे के दौरान उसके पास पानी की बोतल, बंदूक व वॉकी टॉकी के अलावा कुछ नहीं होता। अपने साथी जवान से 1200 मीटर की दूरी में एक-दूसरे को क्रॉस करने के दौरान हाय-हेलाे ही कर पाते हैं। 6 घंटे तक 52 डिग्री की तपन में खामोश रहकर उनका पूरा फोकस फेंसिंग की तरफ होता है। वे पाकिस्तान की हर गतिविधि काे अपनी रिपोर्टिंग बुक में दर्ज करते हैं।

गर्म हवाओं में पानी साथ ले गश्त कर रहे जवान

गर्मी से बचने को जहां हम कूलर-एसी चला सोते हैं। वहीं बीएसएफ जवानों का सोचिए, जो दिन-रात उन्हीं गर्म हवाओं के बीच गश्त करते हैं। जवानों के इसी जज्बे को जानने भास्कर टीम तापमापी लेकर बार्डर पर पहुंची। शहर से 27 किमी दूर हिंदूमलकोट बीएसएफ चौकी  का तो आलम यह था कि वहां तारबंदी के पास तापमान 50 डिग्री सेल्सियस था। हवाएं इतनी गर्म कि हम लोग वहां एक मिनट खड़े न रह सकें, लेकिन बीएसएफ के जांबाज बॉर्डर की चौकसी में मुस्तैद थे, ताकि हम सुरक्षित रह सकें। कुछ जवान टॉवर पर खड़े रह दुश्मन देश पाकिस्तान के रेंजर्स की गतिविधियों पर मुस्तैदी से निगाह रखे हुए थे।

जवान बोले- मौसम कैसा भी हो, ड्यूटी से समझौता नहीं

ओमप्रकाश शर्मा, श्रीकरणपुर बॉर्डर से… दोपहर 3 बजे हम एक सीमा चौकी पहुंचे। महिला कांस्टेबल वहां गश्त कर रही थीं। भास्कर ने पूछा तो चेहरे पर पर किसी तरह की शिकन लाए बिना जवाब दिया कि देश की खातिर कुछ करने के लिए ही बीएसएफ को कॅरिअर बनाया है। देश की सुरक्षा के लिए सख्त ड्यूटी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। ड्यूटी से कोई समझौता नहीं है। मौसम का मिजाज सख्त होने का जिक्र होने पर जवानों का कहना था कि दुश्मन का कोई भरोसा नहीं। एक जवान ने बताया कि इस गर्मी में हमारे दो ही हथियार हैं- नींबू पानी व प्याज। इन्हीं से हम गर्मी को हरा खुद को इससे बचाते हैं।

चीनी, नमक और नींबू का घोल करवाता है सुकून का अहसास

जवानों ने बताया कि गर्मी के प्रकाेप से बचने के लिए नींबू रस, चीनी और नमक का घोल ड्यूटी के दौरान बार-बार पीते रहते हैं, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। राइफल दुश्मन के नापाक इरादों को नेस्तनाबूद करने के काम आती है तो नींबू रस, चीनी और नमक का घोल गर्मी पर असरदार हथियार सा ही काम करता है।

न कोई पेड़ न ही कोई छाया, फिर भी सब मुस्तैद

दोपहर 2 बजे हिंदुमलकोट बॉर्डर पर तारबंदी के पास भास्कर ने जब तापमापी लगाकर देखा तो चंद मिनटों में ही पारा 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। तारबंदी के पास जिस जगह गश्त होती है, वहां न तो कोई पेड़ है और न ही छाया के लिए कोई अन्य व्यवस्था। भास्कर के एक सवाल पर महिला कांस्टेबलों ने कहा- हमारी तो ट्रेनिंग ही ऐसी होती है। हमें एक ही बात का ध्यान रखना है कि दुश्मन हमारी सरहद में न घुसने पाए, फिर चाहे मौसम कैसा ही हो। हर मौसम में हम जवान हर पल अलर्ट रहते हैं।