शेरनी की मौत के तीसरे ही दिन 9 महीने की बाघिन ‘रिद्धी’ भी मरी


जयपुर. बायोलॉजिकल पार्क में जानवरों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। शेरनी ‘सुजैन’ की मौत की आंच अभी सुलग ही रही थी कि तीसरे ही दिन 9 महीने की बाघिन ‘रिद्धी’ की मौत हो गई। लापरवाही की हद यह है कि बायोलॉजिकल पार्क के डॉक्टर को यह तक पता नहीं था कि मादा फीमेल बच्चा बीमार है और खाना भी ढंग से नहीं खा पा रहा।

बल्कि वो यह कहकर खुद की गलती छिपाते रहे कि वह तो पूरी तरह स्वस्थ था। बता दें कि इससे पहले भी पार्क में वूल्फ, उसके बच्चे, भालू, पैंथर की मौत हो चुकी है। वन विभाग इनको लेकर गंभीर नहीं था। भास्कर के हालात सामने रखने के बाद अब चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने आईएफएस ऑफिसर और सीसीएफ को जांच सौंपी है।

गुजरात की बीमारी ने दस्तक दी, इसके बावजूद बगैर स्क्रीनिंग जोधपुर से शेर ला रहे: गुजरात में दो दर्जन से ज्यादा शेरों की जीवनलीला समाप्त करने वाली खतरनाक बीमारी ‘केनाइन डिस्टेंपर’ ने बायोलॉजिकल पार्क में दस्तक दे दी है। आईवीआरआई बरेली के डॉक्टरों ने शेरनी सुजैन की मौत की यही वजह बताई है। इसके बावजूद बगैर बाकी जानवरों की स्क्रीनिंग के जोधपुर से नर शेर लाया जा रहा है।

पोस्टमार्टम में बाघिन के सारे अंग खराब मिले, किडनी 5 गुना बढ़ी थी, पेट खाली: सुबह साढ़े 10 बजे बाघिन बच्चे का पोस्टमार्टम कराया गया। ज्यादातर इंटरनल ऑर्गन लंग्स, लिवर आदि खराब थे। किडनी की साइज करीब पांच गुना मिली। वहीं पेट खाली था। मतलब साफ था कि देखरेख नहीं हो रही थी। इसको स्वस्थ बताने वाले न तो जांच कराई थी, न बीमारी ही पता थी।

…और बेखबर डॉक्टर ने कहा, बाघिन रिद्धी बिल्कुल स्वस्थ थी: मैं तो शेर लाने के लिए जोधपुर आया हुआ हूं, क्या कहानी घटी है पता नहीं। टाइगर का बच्चा बिल्कुल बीमार नहीं था। कोई बीमारी नहीं थी। खाना खा रहा था। (केनाइन डिस्टेंपर की आशंका है तो शेर क्यों ला रहे हैं?) यह तो मैनेजमेंट जाने।  -डॉ. अशोक तंवर, बायोलॉजिकल पार्क

जिम्मेदार बोले- मामला बहुत सीरियस है, मैं सीसीएफ से जांच करवा रहा हूं: मसला सीरियस है। मैं सीसीएफ से जांच करवा रहा हूं। लाॅयन लाने का मामला भी वो देखेंगे। -अरिंदम तोमर, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन