गंदे कपड़े पर चिपकी चीटिंयों ने कर दी कोख खोखली, बच्चेदानी खोने का यह दर्द बहुत भयावह है

राजस्थान देश के उन 10 राज्याें में है जहां 20-35 साल की उम्र की 1000 में 10 महिलाएं अपनी कोख खो देती हैं। हालांकि, देश में इस उम्र में गर्भाशय गंवा देने वाली महिलाओं की संख्या 1000 में 17 है।

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंस की रिपोर्ट के अनुसार कम उम्र में कोख गंवा देने का सबसे बड़ा कारण माहवारी के दौरान सेनेट्री नेपकिन के इस्तेमाल का अभाव या गंदे कपड़े या अन्य चीजों का उपयोग है। पढ़ें  प्रदेश के पांच जिलों में कोख गंवाने वाली महिलाओं का दर्द। किसी ने कपड़े से चिपकी चीटिंयों की वजह से बच्चेदानी गंवा दी तो किसी ने बेक्टिरिया वाले कपड़े की वजह से अपनी कोख खो दी।

कपड़े से चिपकी चीटिंयों ने उजाड़ी सबु देवी की कोख
माहवारी के वक्त गंदे कपड़े के इस्तेमाल ने भीलवाड़ा के तिलोली गांव की 32 वर्षीय सबु देवी कालबेलिया ने माहवारी शुरू होने पर छत में रखा कपड़ा इस्तेमाल किया था। कपड़े पर चिपकी चीटिंयों के कारण सबुु देवी की बच्चेदानी में बड़े-बड़े छेद हो गए। निजी अस्पताल में दिखाया तो पता चला कि उसकी बच्चेदानी खराब हो गई है। ऑपरेशन के जरिए बच्चेदानी निकालने और दवाइयों पर एक लाख से ज्यादा रुपए खर्च हो गए।

लक्ष्मी : जीवन भी उजड़ा और कोख भी, कर्ज चढ़ा
राजसमंद जिले के समीचा देवरिया गांव की लक्ष्मी गर्भाशय गंवा चुकी है। 15 साल की उम्र में लक्ष्मी के पति की मौत हो गई। जब दूसरी की शादी की तैयारी होने लगी, उस  वक्त गंदे कपड़े के इस्तेमाल के कारण उसकी बच्चेदानी में छेद हो गए। इलाज पर एक लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो गए। 20 साल की उम्र आते-आते लक्ष्मी की बच्चेदानी निकाल दी गई। लक्ष्मी का इलाज आज भी जारी है।

राधा: छिपाकर रखती हैं माहवारी का कपड़ा 
भीलवाड़ा जिले के दावड़िया गांव की 22 साल की राधा बागरिया पिछले 3 साल से गंदे कपड़े के इस्तेमाल का दंश झेल रही है। रिश्तेदारों और साहूकारों के कर्ज के तले दबी राधा काे चिकित्सकों ने बच्चेदानी निकालनी की सलाह दी है। गंदे कपड़े के इस्तेमाल के कारण राधा की बच्चेदानी में छेद हो गया है। राधा कपड़ा घर से 200 मीटर दूर जंगल में पत्थरों के बीच छिपाकर रखती है।

नर्मदा : गंदे कपड़े से खराब हुई कोख ने बनाया कर्जदार 
अजमेर जिले की जवाजा तहसील के सुहावा गांव की नर्मदा माहवारी में कपड़े के इस्तेमाल के कारण अपनी बच्चेदानी गंवा चुकी है। 30 साल की उम्र में नर्मदा की बच्चेदानी निकाल दी गई। पहले नर्मदा अपने पति का काम में हाथ बंटाती थी लेकिन अभी घर से बाहर भी नहीं निकल पाती। बच्चेदानी के ऑपरेशन में डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो गए। परिवार कर्ज में डूब गया।

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ब्रांडेड V/S लोकल : थोड़े महंगे पर सेफ होते हैं ब्रांडेड पैड्स, कई स्तर पर क्वालिटी चेक : एक्सपर्ट
सेनेट्री पैड्स के इस्तेमाल में महंगा-सस्ता नहीं बल्की हाइजीन का ध्यान रखना चाहिए। महिलाओं काे माहवारी में उन्हीं ब्रांडेड पैड्स का इस्तेेमाल करना चाहिए जो कई रेगुलर कई स्तर के क्वालिटी जांचों से गुजरते हों। -डॉ. नीलम बापना, स्त्रीरोग विशेषज्ञ

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