‘बगुलामुखी जयन्ती’ विशेष



शास्त्रों के मुताबिक वैशाख मास शुक्ल पक्ष अष्टमी को मां बगुलामुखी का जन्मदिवस माना जाता है। इसलिए इस तिथि को ‘बगुलामुखी जयन्ती’ मानने की परम्परा चली आ रही है। इस बार 23 अप्रैल दिन बुधवार को मां बगुलामुखी की जयन्ती पड़ रही है।

 

मां बगलामुखी को पीताम्बर या ब्रह्मास्त्र रुपणी भी कहा जाता है। शत्रुओ को नष्ट करने की इच्छा रखने वाली तथा समिष्टि रूप में परमात्मा की संहार शक्ति ही बगला है। पीताम्बरा विद्या के नाम से विख्यात बगलामुखी की साधना प्रायः शत्रुभय से मुक्ति और वाक्सिद्धि, वाद-विवाद में विजय के लिये माॅ बगुलामुखी की उपासाना की जाती है। इनकी उपासना में हल्दी की माला पीले फूल और पीले वस्त्रो का विधान है। दश माहविद्याओ में इनका आठवां स्थान है।

 

एक बार की बात है कि सतयुग में सम्पूर्ण जगत को नष्ट करने वाला एक भयंकर तूफान आया। सभी प्राणियो के जीवन पर संकट को देख कर भगवन विष्णु व्यथित होकर भगवान शंकर के पास समस्या के समाधान हेतु गये । भोले बाबा ने विष्णु जी से कहा कि आप सौराष्ट्र देश में हरिद्रा सरोवर के समीप जाकर भगवती को प्रसन्न करने के लिये तप करो वही इस तूफान से समस्त जगत के प्राणियों की रक्षा कर पायेगी।

विष्णु जी के तपस्या से प्रसन्न होकर श्रीविद्या ने उस सरोवर से बगलामुखी रूप में प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया तथा विध्वंसकारी तूफान का तुरंत स्तम्भन कर दिया। बगलामुखी महाविद्या भगवन विष्णु के तेज से युक्त होने के कारण वैष्णवी है। मंगलयुक्त चतुर्दशी की अर्धरात्रि में इसका प्रादुर्भाव हुआ था। श्री बगलामुखी को ब्रह्मास्त्र के नाम से भी जाना जाता है