डॉक्टर बोला- रुपए नहीं दिए तो पैर में पड़ी रॉड निकाल दूंगा, मरीज को बेड से नीचे पटका


एसएमएस में भामाशाह योजना के तहत आने वाले मरीजों से भी इलाज के पैसे लिए जाते हैं। यदि मरीज पैसे नहीं देता तो उसे ऑपरेशन को खराब करने की धमकी दी जाती है।

मामले का खुलासा हुआ है उस वीडियो रिकॉर्डिंग में जिसमें डॉक्टर (डॉ. नविन्दु) मरीज के परिजन को कह रहा है- ‘अगर उन्होंने पैसे नहीं दिए तो जो रॉड (आर्थो) डाली गई है, वह निकाल दूंगा।’ परिजनों ने डॉक्टर को आठ हजार रु. तो दे दिए लेकिन जब 25 हजार रु.  मांगे गए तो वे घबरा गए। मौके पर भास्कर रिपोर्टर पहुंचे और अस्पताल अधीक्षक को लिखित शिकायत की। अधीक्षक ने कार्रवाई करते हुए मरीज को खुद की यूनिट में भर्ती किया। साथ ही यूनिट के सभी डॉक्टर्स को तलब किया।

16 को एक्सीडेंट के बाद भर्ती हुआ था मरीज

  • जमवारामगढ़ तहसील का घाटा जलदहारी के सत्यनारायण मीणा का 16 सितम्बर को एक्सीडेंट हो गया। शाम करीब पांच बजे वे एसएमएस ट्रोमा पहंुंचे।
  • उन्हें ऑपरेशन के लिए बोला गया। भामाशाह कार्ड धारक होने पर उन्हें भर्ती तो कर लिया गया लेकिन कहा गया कि रॉड पड़ेगी और रॉड बाहर से लानी होगी।
  • परिजन कन्हैया और अन्य ने कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं। डॉक्टर ने कहा कि ऑपरेशन तो कर देते हैं, पैसे कम हाे जाएंगे। इसके बाद 16 की रात करीब दो बजे ऑपरेशन कर दिया गया और 17 सितम्बर को ही नार्थ विंग में शिफ्ट कर दिया गया।
  • सेकेंड ईयर का डॉ. नविन्दु परिजनों के पास गया और कहा कि पैसे दो। परिजनों ने मना किया तो बोला- पैसे नहीं दिए तो रॉड निकाल लेंगे। चिल्लाकर बोला- इसे वापस ऑपरेशन थिएटर में ले चलो, रॉड निकालेंगे। इस पर परिजन घबरा गए और बोले कि दे देंगे।
  • इसके बाद वह वापिस आया और 18 की रात को परिजनों ने उसे आठ हजार रुपए दे दिए। वहीं बार-बार झड़प होने के बाद सत्यनारायण को बेड से नीचे पटक दिया गया। बेड पर दूसरे मरीज को लिटा गया, उसके हाथ में फ्रेक्चर था और सत्यनारायण के पैर में। यानि कि बैड की ज्यादा जरूरत सत्यनारायण को थी।

कौन सच्चा, कौन झूठा

  • हमारे पास एक हजार रुपए भी नहीं थे और डॉक्टर ने हमसे 25 हजार रु. मांगे। हमसे बाहर से रॉड लाने को नहीं कहा गया। हमने सिर्फ जल्दी इलाज करने को कहा था। – कन्हैया, मरीज के परिजन
  • मरीज का भामाशाह कार्ड था लेकिन वह तुरंत ऑपरेशन के लिए बोल रहा था। इसलिए बाहर से रॉड मंगाकर ऑपरेशन किया गया। यदि बाहर से नहीं मंगाते तो और कई दिन उसका ऑपरेशन नहीं हो पाता। जब परिजनों के पास देने के लिए एक हजार रुपए भी नहीं थे, तो बाद में आठ हजार कहां से आ गए। -डॉ. आरसी मीणा, यूनिट हेड, आर्थो विभाग, एसएमएस अस्पताल।

अधीक्षक बोले- पैसे क्यों मांगे, जांच करेंगे

हमने बाहर से रॉड-प्लेट मंगाने पर पूरी तरह सख्ती कर रखी है। कोई भी बाहर से नहीं मंगा सकता। इसके बावजूद क्यों मंगाई, इस बारे में पूछताछ की जाएगी। मैंने पूरी मरीज से पूरी जानकारी ले ली है। भामाशाह में पैसे नहीं लगते, फिर क्यों पैसे मांगे गए, पूरा मामला समझ के परे हैं। कुछ भी हो, इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. डीएस मीणा, अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल।

डॉक्टरों ने मरीज की छुट्‌टी की, अधीक्षक ने भर्ती किया 
भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला कि विभाग के डॉक्टर्स ने तो सत्यनारायण की छुट्टी ही कर दी है। भास्कर ने जब अस्पताल अधीक्षक डॉ. डीएस मीणा से बात की तो उन्होंने मरीज को बेड पर लेने और खुद की यूनिट में भर्ती करवाने के लिए कहा।