पहला सीडीएस 1962 के चीन युद्ध से पहले मिल सकता था, नेहरू अपने ही रक्षा मंत्री के विरोध से पीछे हट गए


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से सैन्य बलों के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) का पद बनाने की घोषणा की है। सीडीएस थल सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों काे प्रभावी नेतृत्व प्रदान करेगा और उनके बीच समन्वय बढ़ाने के लिए काम करेगा।

विशेषज्ञ और पूर्व सैनिक लंबे समय से कई मौकों पर यह मांग कर चुके थे। पंडित नेहरू1962 के चीन युद्ध से पहले देश में सीडीएस बनाना चाहते थे, पर उस वक्त वे कामयाब नहीं हो सके थे। सीडीएस बनाने का पहला आधिकारिक प्रस्ताव 1999 में करगिल युद्ध के बाद बनी करगिल रिव्यू कमेटी (केआरसी) ने 2000 में दिया था यानी करीब 20 साल पहले। भारत में अभी सीडीएस का एक बहुत ही कमजाेर विकल्प काम कर रहा है। चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) के चेयरमैन के जिम्मे यह काम है। तीनों सेनाओं के प्रमुखों में जो सबसे वरिष्ठ होता है, वह इस पद को संभालता है और उसके रिटायर होते ही यह पद दूसरे को मिल जाता है। अभी वायु सेना प्रमुख बी.एस. धनाेआ इस पद पर हैं।

सीडीएस पद के लिए पूर्व रक्षा मंत्री पर्रिकर ने काम शुरू किया था

विशेषज्ञों के अनुसार, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनने के बाद डिफेंस प्लान की प्राथमिकता आसान होगी। जैसे- सबसे ज्यादा खर्च किस पर होना चाहिए। उपकरणों पर, फाइटर प्लेन पर या सबमरीन पर। नरेंद्र माेदी सरकार के पिछले कार्यकाल में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस दिशा में कुछ काम शुरू किया था, लेकिन तब सीडीएस की नियुक्ति पर फैसला नहीं हो सका था। तीन साल पहले सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा था कि वह इस मामले पर सभी दलों के बीच सहमति चाहती है और अभी चर्चा की प्रक्रिया पूरी न हाे पाने की वजह से इस पर फैसला नहीं हो सका है। पर्रिकर ने इस बारे में शेकतकर कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद फैसला करने की बात कही थी। पढ़िए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के बारे में सबकुछ

5 W, 1 H से समझिए सरकार की इस नई घोषणा को

WHAT: क्या होता है चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
आसान भाषा में कहें तो यह तीनों सेनाओं का सर्वोच्च पद होगा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ वह अकेला व्यक्ति होता है जो रक्षा योजनाओं और प्रबंधन पर सरकार को सलाह देता है। वह तीनों सेनाआें में कॉर्डिनेशन तो बनाएगा ही, साथ ही मैन पावर, उपकरण और एक्शन प्लान पर भी सरकार के संपर्क में रहेगा। किसी भी ऑपरेशन में तीनों सेनाओं की ज्वाइंट मैनशिप भी सुनिश्चित करेगा। इससे इंटेलिजेंस ग्रिड और नेशनल सिक्योरिटी में तालमेल सुनिश्चित हो पाएगा। इस पद पर बैठा शख्स तीनों सेनाओं का उपयोग सुनिश्चित करेगा।

WHEN: कब से मांग हो रही थी देश में इस पद की
20 साल तक चली बहस के बाद अब सीडीएस की नियुक्ति हाेने जा रही है। हालांकि, रक्षा बलांे के भीतर भी सीडीएस की नियुक्ति को लेकर एक राय नहीं है। केआरसी की रिपोर्ट के बाद वायु सेना ने इसका विरोध किया था। वायु सेना और नौसेना को लगता है कि थल सेना बड़ी है, इसलिए हमेशा सीडीएस थल सेना से ही बनेगा। आर्काइव्स के अनुसार, यूं तो पंडित नेहरू 1962 के चीन युद्ध से पहले देश में सीडीएस बनाना चाहते थे, पर तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन के विरोध से पीछे हट गए थे।

WHY: क्यों जरूरत है देश को सीडीएस के पद की

  • सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर राजीव भूटानी अपनी किताब ‘रिफॉर्मिंग एंड रिस्ट्रक्चरिंग: हायर डिफेंस ऑर्गेनाइजेशंस ऑफ इंडिया’ में लिखते हैं कि ‘भारत अकेला देश है, जहां एक सिविल अधिकारी (रक्षा सचिव) रक्षा के लिए जिम्मेदार होता है। मतलब नौकरशाह युद्ध की योजना बनाता है। तीनों सेनाध्यक्ष उसे लागू करते हैं।
  • पूर्व चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ एनसी विज ने तीन साल पहले एक अंग्रेजी पत्रिका में लिखा था कि सीडीएस बनाने की जरूरत इसलिए है, क्योंकि इससे सरकार अलग-अलग सेनाओं की राय में दिखने वाले मतभेदों को दूर कर एक उचित सैन्य फैसले पर पहुंच सकेगी।

WHO: कौन बनेगा पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
अभी तक सरकार ने कोई नाम तय नहीं किया है। लेकिन माना जा रहा है कि 26वें  चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल बिपिन रावत इस पद की रेस में बाकी दूसरे नामों से आगे हैं। रावत दिसंबर में रिटायर होने वाले हैं। हालांकि, अभी तक यह तय नहीं है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की रैंक तीनों सेनाओं के प्रमुखों से ऊपर रहेगी या बराबर। इसे लेकर अभी अलग-अलग बातें कही जा रही हैं। इसी तरह अभी तक यह भी तय नहीं है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ(सीडीएस) का कार्यकाल कितने समय का होगा।

WHERE: हमारे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के समकक्ष कौन-कौन हैं?

  • अमेरिका: यहां चेयरमैन ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीजेसीएससी) हमारे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के समकक्ष पद है और वह सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री को राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरिक सुरक्षा पर सलाह देता है। जनरल जोसेफ डनफोर्ड मौजूदा सीजेसीएससी हैं।
  • ब्रिटेन: यहां चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ही सेना का प्रोफेशनल हेड होता है। वह रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री का प्रमुख सुरक्षा सलाहकार होता है। वह मंत्रालय के स्थायी अवर सचिव के साथ मिलकर प्लानिंग और योजनाओं पर काम करता है। जनरल सर निक कार्टर मौजूदा सीडीएस हैं।
  • चीन: यहां ज्वाइंट स्टाफ डिपार्टमेंट ऑफ द सेंट्रल मिलिट्री कमीशन ही पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की सर्वोच्च संस्था है। यह सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के तहत काम करता है। इसका मुख्यालय बीजिंग में है। मौजूदा चीफ ऑफ ज्वाइंट स्टाफ जनरल ली जोउचेंग प्रमुख हैं।
  • फ्रांस: यहां चीफ ऑफ स्टाफ ऑफ आर्मीज ही सभी सेनाओं का प्रमुख होता है। वही सभी तरह के सैन्य ऑपरेशनों का नेतृत्व करता है। प्लानिंग से लेकर एक्जीक्यूशन तक सारे ऑपरेशंस इन्हीं के जिम्मे हैं। अभी जनरल फ्रांकोसिस लैकोन्त्रे इस पद पर हैं।

HOW: कैसे होगा चुनाव
इसे लेकर भी कोई स्पष्टता नहीं है। लेकिन माना जा रहा है कि एक टॉप लेवल की क्रियान्वयन समिति सीडीएस के तौर तरीकों और भूमिका के बारे में नवंबर तक काम करेगी। सीडीएस की रैंक आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के चीफ से ऊपर हो सकती है, भले ही वह उनकी तरह ही 4-स्टार जनरल हो। भविष्य में इसे 5-स्टार जनरल भी किया जा सकता है।

रिटायर्ड जनरल वीपी मलिक से जानिए, आखिर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ क्यों जरूरी

  • “चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति से तीनों सेनाओं के बीच कॉर्डिनेशन से संबंधित कई समस्याओं का हल निकल आएगा। जैसे कि करगिल युद्ध के दौरान समस्या आई थी कि जब हम वायुसेना के साथ मिलकर एक ज्वाइंट ऑपरेशन करना चाहते थे तो कैबिनेट से इजाजत लेनी पड़ी थी। कैबिनेट नहीं चाहती थी कि इसमें एयर फोर्स का इस्तेमाल किया जाए। उनको मनाने में काफी समय लगा। इसलिए जब करगिल रिव्यू कमेटी का गठन हुआ तो उसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त करने की सिफारिश की गई।”
  • “कमेटी ने और भी कई सिफारिशें की थीं जिनमें से लगभग सभी को मान लिया गया, लेकिन सीडीएस के प्रस्ताव पर डिसीजन ही नहीं हुआ। बाद में इस पर राय देने के लिए बनी मंत्रियों की कमेटी के चेयरमैन तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी थे। उस समय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इसे लागू करना चाहते थे लेकिन राजनीतिक दलों के बीच एकराय न होने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। मतभेद भाजपा में नहीं थे, बल्कि कांग्रेस इस पर राजी नहीं थी।”
  • ” बाद में 2011 में डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने नरेश चंद्रा कमेटी बनाई थी, उन्होंने भी सीडीएस नियुक्त करने की सिफारिश की, लेकिन उसकी ताकत कुछ कम करके। 2016 में जनरल डीबी शेकतकर कमेटी बनाई। 2017 में इसकी रिपोर्ट आई और इसमें से कुछ हिस्से को लागू कर दिया गया। बेशक चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति की बात पिछले 20 साल से चल रही है, लेकिन 15 अगस्त को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा की तो हमारे लिए ये एक सरप्राइज की तरह था।”
  • “2001-02 की रिपोर्ट में ये स्पष्ट है कि इसकी जरूरत क्यों है? चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ कमेटी ही कई बार कॉर्डिनेशन को संभाल पाता है। इससे ऑपरेशनल प्लानिंग, स्ट्रेटजिक प्लानिंग, मिलिट्री स्ट्रेटजी, डिफेंस प्लानिंग में आसानी होगी। अब सरकार ने इसे घोषित किया है तो उम्मीद है कि जल्द ही इंप्लीमेंटेशन कमेटी बना कर इसका रोल व काम तय किया जाएगा, सरकार से कैसे संबंध होंगे, क्या राय दी जाएगी? जब आपके पास सीडीएस होगा तो तीनों सर्विसेज में इंटीग्रेशन और साझा होगा और सैन्य रणनीति और ऑपरेशनल इफेक्टिवनेस बेहतर होगी। ताकत का सर्वोत्तम उपयोग हो सकेगा। इससे खर्च बचेगा। इस समय तीनों शक्तियां अपने-अपने दायरे में काम कर रही हैं, जिसमें बहुत सारा डुप्लीकेशन है।”
  • “सीडीएस के पास पूरी ताकत नहीं होगी। इंटीग्रेशन हम टॉप लेवल पर चाहते हैं और ज्वाइंटनेस नीचे के स्तर पर। पॉलिसी बनाने में दिक्क्त नहीं आएगी। इससे रक्षा मंत्री की ताकत कम नहीं होगी। वह रक्षा मंत्री और कैबिनेट कमेटी ऑफ सिक्योरिटी (सीसीएस) दोनों का सलाहकार होगा।”