प्याज के बढ़े दामों ने शीला को दिलाई मुख्यमंत्री की कुर्सी, एक वक्त ऐसा आया जब पद छोड़ना चाहती थीं


कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित (81) का शनिवार को कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। वे 1998 से 2013 तक लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। शीला दीक्षित ने दिसंबर 1998 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज को हराकर दिल्ली की सत्ता हासिल की। उस समय प्याज-टमाटर के दाम 60 रुपए प्रति किलो पहुंच गए थे। कांग्रेस ने नारा दिया- हाय रे! आम आदमी की हालत कैसी ही खस्ता, है प्याज-टमाटर महंगा, आदमी है सस्ता।

शीला ने गोल मार्केट सीट से चुनाव जीता और पहली बार मुख्यमंत्री बनीं। इस दौरान ऐसा वक्त भी आया, जब वे बीमारी से परेशान होकर पद छोड़ना चाहती थीं। लेकिन 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुए निर्भया दुष्कर्म मामले के दौरान बनी परिस्थितियों के चलते उन्होंने अपना मन बदल लिया। दीक्षित ने ऑटोबायोग्राफी, ‘सिटीजन दिल्ली: माई टाइम, माई लाइफ’ में लिखा- ”परिवार ने मुझसे कहा था कि मुझे हर चीज से पहले स्वास्थ्य की चिंता करने की जरूरत है। मेरा इस्तीफा लगभग तय था। उस वक्त विधानसभा चुनाव में एक साल का समय था। पार्टी के पास मेरा विकल्प खोजने का पर्याप्त समय था।”

‘निर्भया मामले के वक्त इस्तीफा देना युद्धभूमि छोड़ने जैसा था’

शीला दीक्षित जिस वक्त पद छोड़ने के फैसले के बारे में कांग्रेस हाईकमान को बताने का सोच रही थीं, उसी दौरान बस में पैरामेडिकल स्टूडेंट के साथ दुष्कर्म और दरिंदगी की घटना सामने आई। दीक्षित ने लिखा है- ”परिवार ने मुझे स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ने की सलाह दी थी। लेकिन तब मुझे लगा कि निर्भया मामले के बाद बने हालातों के बीच पद छोड़ना युद्धभूमि से भागने जैसा है। केंद्र सरकार इस मामले में सीधा दोषारोपण नहीं चाहती थी। मुझे पता था कि विपक्ष इस घटना पर सीधे दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा करेगा। फिर मैंने पद छोड़ने का फैसला बदल लिया।”

शीला वेस्टर्न संगीत और फिल्मों की शौकीन थीं
दीक्षित को युवावस्था से ही वेस्टर्न संगीत पसंद था। वे अपने पसंद के गाने सुनने के लिए रेडियो के पास बैठकर इंतजार करती थीं। उन्हें फुटवियर का भी काफी शौक था। उनके पास इसका अच्छा खासा कलेक्शन भी था। इसका जिक्र उन्होंने ऑटोबायोग्राफी में भी किया है। शाहरुख खान की ऐसी फैन थीं कि ‘दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे’ फिल्म घर पर कई बार देखी। घर वालों को कहना पड़ा कि अब बस करें। हैमलेट (ब्लैक एंड व्हाइट) उनकी सबसे पसंदीदा फिल्म थी।