महादेव का चमत्कारी मंदिर, साल में 2 बार सूर्यदेव की किरणों से होता है इस शिवलिंग का अभिषेक


मध्य प्रदेश के हरदा जिले की खिरकिया तहसील में एक चमत्कारी मंदिर है, जहां पर सूर्यदेव स्वयं एक साल में दो बार शिवलिंग का अभिषेक अपनी किरणों से करते हैं. जी हां यह चमत्कारी मंदिर है प्राचीन गुप्तेश्वर मंदिर चारुवा में. जहां गर्भगृह स्थित भगवान भोलेनोथ के शिवलिंग का अभिषेक सूर्यदेव की किरणें करती हैं. यह नजारा अपने आप में अद्भुत और अद्वितीय होता है. वास्तु कला का बेजोड़ नमूना कहे जाने वाले गुप्तेश्वेर मंदिर कई रहस्यों से परिपूर्ण है. यहां पर जब प्रात: सूर्य की किरणें गर्भगृह स्थित शिवलिंग पर पड़ती हैं तो शिवलिंग एक अलौकिक ज्योत के समान दिखाई देता है. जिसे देखने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं.

भक्त के स्वप्न में आए थे भगवान शिव

कहा जाता है कि यह प्राचीन मंदिर लगभग 5 हजार वर्ष पुराना है, जहां आज एक विशाल मंदिर है. वहां कभी घना बीहड़ हुआ करता था. एक शिव भक्त के स्वप्न में आकर भगवान शिव ने इस स्थान पर होने के संकेत दिए थे. इसके बाद बताए गए स्थान पर खुदाई करने पर एक विशाल शिव मंदिर अस्तित्व में आया.

कोणार्क के सूर्य मंदिर जैसी बनती है स्थिति

हिंदू पंचांग के वैशाख माह में अप्रैल के अंतिम दिनों से मई माह के प्रारंभ में प्रतिवर्ष यह चमत्कारी नजारा देखने को मिलता है. जब शिवलिंग पर सूर्य की किरणें अपनी संपूर्ण आभा बिखेरती है और शिवलिंग एक ज्योत के समान दिखाई देता है. यह नजार करीब 7-8 मिनिट तक रहता है. इसी तरह सूर्य के दक्षिणायन के दौरान सितंबर-अक्टूबर में 28 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच दूसरी बार ऐसा ही अभिषेक होता है. इस तरह की घटना कोणार्क के सूर्य मंदिर सहित देश के विरले मंदिरों में ही होती है, जो प्राचीन मंदिरों में वास्तु की गहरी सोच व दूरदृष्टिता को प्रकट करता है.

250 साल से अस्तित्व में है मंदिर

ग्राम पंचायत चारुवा के उपसरपंच संजय नामदेव के अनुसार हरिपुरा स्थित बाणगंगा नदी के मुहाने पर प्राचीन गुप्तेश्वर महादेव का ऐतिहासिक मंदिर है. इसे अस्तित्व में आए करीब 250 वर्ष हो चुके हैं. कहा जाता है कि यह प्राचीन मंदिर लगभग 5 हजार वर्ष पुराना है, जहां आज एक विशाल मंदिर है. वहां कभी घना बीहड़ हुआ करता था. एक शिव भक्त के स्वप्न में आकर भगवान शिव ने इस स्थान पर होने के संकेत दिए थे. इसके बाद बताए गए स्थान पर खुदाई करने पर एक विशाल शिव मंदिर अस्तित्व में आया.

वर्तमान में मंदिर के पुजारी गणेश पुरी हैं. मंदिर के स्थानीय ट्रस्टी प्रवीण अग्रवाल एवं मनोज जैन ने बताया कि खगोलशास्त्र में रुचि रखने वाले शिवभक्त किशोर गंगराड़े द्वारा बारीकी से किए गए अध्ययन और श्रीगुप्तेश्वर को अपना आराध्य मानने वाले भक्तों, इस मंदिर से जुड़े पंडितों की अभिरुचि का ही प्रतिफल है कि यह चमत्कार जनमानस तक पहुंच पाया है. पूर्व में विरले लोगों तक ही इस चमत्कार की जानकारी सीमित थी. अब इस मंदिर से जुड़े कई रहस्य इतिहास के गर्भ में हैं.