पिछली सरकार ने लगाई थी रोक, अब रिकवरी के आदेश


कर्मचारियों के वेतनमान संशोधन की अनुसूची पांच में वेतन विसंगति के प्रकरणों का निर्धारण किए जाने के 2 साल बाद फिर अब कई विभागों ने रिवकवरी के आदेश निकालने शुरू कर दिए हैं। कर्मचारियों के वेतन कटौती के प्रस्तावों से मामला फिर से गरमा गया है। मामले की जानकारी मिलने के बाद मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने एसीएस वित्त को इस मामले में दखल देने के लिए लिखा है। पिछली गहलोत सरकार ने 2013 में 1750, 2400 और 2800 ग्रेड वे वाले कैडर्स की ग्रेड पे रिवाइज करने के आदेश जारी किए थे। लेकिन इन कर्मचारियों की ग्रेड पे के साथ रनिंग पे बैंड में इजाफा कर दिया गया।

इसके बाद पिछली वसुंधरा सरकार में वित्त विभाग ने राजस्थान सिविल सर्विसेज रिवाइज्ड पे रूल्स का हवाला देते हुए इस अधिसूचना को गलत बताया था। तर्क था कि पे रूल्स में ग्रेड पे में इजाफा किए जाने संबंधित प्रावधानों में रनिंग पे बैंड का वेतन समान स्तर पर निर्धारित करने और इसमें संशोधित ग्रेड पे जोड़कर वेतन निर्धारित करने का प्रावधान है। जबकि इन कर्मचारियों की ग्रेड में इजाफे के साथ रनिंग पे बैंड भी बदल दिया गया जो कि गलत था। इसलिए इस मामले में उन्हें उसी ग्रेड पे पर फिक्स किए जाने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद वेतन में कटौती का प्रस्ताव तैयार हुआ।

चुनाावी साल में वेतन कटौती पर कर्मचारियों का भारी विरोध देखते हुए सरकार ने कैबिनेट सब कमेटी के जरिए यह फैसला लिया कि सातवें वेतनमान में इन कर्मचारियों के पे फिक्सेशन में इस विसंगती को समायोजित किया जाएगा। इसके बाद सातवें वेतनमान के समय सरकार ने अलग से इसके आदेश जारी कर दिए थे। इन आदेशों के साथ ही कर्मचारियों को पे प्रोटेक्शन भी दिया गया जिसके मुताबिक उक्त अवधि तक ज्यादा वेतन ले चुके कर्मचारियों से बकाया वसूली नहीं की गई। लेकिन अब पीएचईडी और बीमा समेत कई अन्य विभागों में एसीपी के प्रकरणों में इन कर्मचारियों को पहले 2013 की वेतन विसंगती का बकाया सरकार को जमा करवाकर सर्विस बुक मेंं उसकी एंट्री करवाने के आदेश जारी हो रहे हैं।

राजस्थान राज्य मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष मनोज सक्सेना के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने बुधवार को इस प्रकरण में मुख्य सचिव डीबी गुप्ता को ज्ञापन सौंपा। मुख्य सचिव ने इस मामले को वित्त विभाग अतिरिक्त मुख्य सचिव निरंजन आर्य फारवर्ड किया है।