यह चमत्कारी मंत्र आपकी सभी मुश्किलों को दूर कर सकता है


चित्रकार संशय में पड़ा हुआ था कि आगे क्या किया जाए। दरअसल वह भगवान महावीर की पेंटिंग तैयार कर रहा था। रेखाओं तक तो वह ठीक चला, लेकिन रंग भरने का समय आया तो ठिठक गया। ऐसी उलझन उसके सामने पहले भी कई बार आई थी, लेकिन तब रंगों का विकल्प दिमाग में होता था। यहां दिगंबर अवस्था को रंगों में ढालने की चुनौती थी। वह सोचने लगा कि किस रंग का प्रयोग करे कि महावीर जीवंत हो जाएं। उसने मुझसे पूछा तो मैंने इतना ही कहा कि किसी को भी तबतक कैनवास पर नहीं उकेरा जा सकता है, जब तक आप उन्हें जान न लें।

काफी समय बाद वह एक दिन मिलने आया। मैंने उससे उस पेंटिंग के बारे में पूछा तो शुक्रिया अदा करते हुए कहा, ‘आपके संकेत के बाद मैं महावीर को जानने की कोशिश में लग गया। लेकिन एक समय बाद महावीर का दिगंबरत्व रंगों से उतरकर विचार में तब्दील हो गया। जितना उनके अर्थ तलाशता, उतना ही नए-नए द्वार खुलने लगे। तब मैं खुद के अंदर उतरता चला गया।’ उस चित्रकार में यह परिवर्तन मेरे लिए भी सुखद अनुभव था। कला में तरह-तरह के प्रयोग होते रहते हैं, लेकिन खुद को प्रयोग में ढालना सबसे बड़ा सृजनात्मक कर्म होता है। इसमें चेतना की जागृति और आनंद की उपस्थिति होती है।

साधारणतया आदमी बाहर की विघ्न-बाधाएं देखता है जबकि असली बाधाएं तो भीतर हैं। जो देवता की तरह ही विचार का आवाहन करता है, वह तय मंजिल की तरफ बढ़ जाता है। उस चित्रकार के सामने भी रंगों का सवाल एक बाधा की तरह था। उसने रंगों को अपने भीतर समेट लिया और उसी से जवाब मांगने लगा। हमें यह समझना चाहिए कि विघ्न-बाधाओं के मूल कारण भीतर हैं, बाहर नहीं। जो कारण बाहर दीखते हैं, उन्हें हटाने की कोशिश में कई बार हम इतने गलत कार्य कर बैठते हैं कि वह घटने की बजाए बढ़ जाते हैं। इसलिए संत-पुरुष कहते हैं उन विघ्न-बाधाओं को दूर करने के लिए तुम भीतर की ओर ध्यान दो। किसी का नाम सुमिरन करो या अपने अंदर झांको या फिर मंत्र जाप करो, वह मददगार बनेगा।