लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक बिल पास, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बनेगा

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक बिल मंगलवार को पास हो गया। राज्यसभा में बिल पर करीब 4 घंटे बहस हुई। अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक को गैर-कानूनी करार दिया था। इसके बाद 2 साल के दौरान यह बिल 3 बार लोकसभा में पास हुआ, लेकिन 2 बार राज्यसभा में अटक गया। तीसरी बार मोदी सरकार को बिल पास कराने में कामयाबी मिली। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा।

बहस के दौरान कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘‘यह (तीन तलाक बिल) लैंगिक समानता और महिलाओं के सम्मान का मामला है। तीन तलाक कहकर बेटियों को छोड़ दिया जाता है, इसे सही नहीं कहा जा सकता।’’ यह विधेयक 25 जुलाई को लोकसभा में पहले ही पास हो चुका है। लोकसभा में बिल के पक्ष में 303 और विरोध में 82 मत पड़े थे। तब कांग्रेस, तृणमूल, सपा और डीएमके समेत अन्य पार्टियों ने बिल का विरोध करते हुए वोटिंग से पहले सदन से वॉकआउट किया था।

16वीं लोकसभा में भी बिल पास हो चुका

इससे पहले 16वीं लोकसभा में भी ट्रिपल तलाक बिल पास हो चुका था, लेकिन तब यह राज्यसभा में अटक गया था। राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमत नहीं है। साथ ही सहयोगी दल जदयू ने भी इस बिल का विरोध किया है। यही कारण है कि भाजपा ने सभी सदस्यों को राज्यसभा में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया था।

राज्यसभा का गणित

पार्टी सदस्य संख्या
भाजपा 78
कांग्रेस 47*
अन्नाद्रमुक 13
तृणमूल 13
सपा 12
बीजद 07
जदयू 06
टीआरएस 06
बसपा 04
शिवसेना 03
अकाली दल 03

* कांग्रेस के संजय सिंह ने आज ही सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और उनका इस्तीफा मंजूर भी कर लिया गया है।

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