ये खास मंदिर में तीन देवियां करती हैं एक साथ वास


दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है, जहां मंदिरों कि बहुलता देखी जा सकती है। खास बात तो यह है कि, यहां मौजूद हर मंदिर कि अपनी अलग मान्यता है। आज हम आपसे एक ऐसे ही खास मंदिर के बारे में चर्चा करने वाले हैं, जहां पर एक साथ तीन देवी विराजमान है। और अगर आप तीनों देवी कि पूजा-अर्चना करते हैं, तो इससे आपकी मनोकामना निश्चित ही पूरी होती है, लेकिन अगर आप तीनों में से किसी भी देवी की आराधना करने से चूक जाते है। तो इससे आपकी पूजा भी अधूरी मानी जाती है। यह खास मंदिर अपनी मन्नत को पूरा करने के लिए जाना जाता है, जिसका नाम तीन चौपड़ है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में कुछ खास बातें..

इन चौपड़ो पर मां दुर्गा, महालक्ष्मी और देवी सरस्वती के यंत्र स्थापित किए गए हैं। मां सरस्वती का यंत्र छोटी चौपड़ पर स्थापित कर पुरानी बस्ती में सरस्वती के पुजारी विद्वानों को बसाया गया। जो यहां पूजा अर्चना करते थे। रामगंज चौपड़ पर मां दुर्गा का यंत्र स्थापित कर उस क्षेत्र में योद्धाओं को बसाया। जो उस यंत्र की रक्षा कर सकें। बड़ा चौपड़ में महालक्ष्मी का यंत्र स्थापित कर देवी लक्ष्मी का शिखरबंध मंदिर बनवाया गया। जिसका नाम माणक चौक रखा। मंदिर में नंदी पर सवार माता पार्वती के साथ भगवान शिव का दुर्लभ विग्रह है।

जयपुर की स्थापना के समय महाराजा जयसिंह ने एक मीणा सरदार भवानी राम मीणा को आमेर रियासत के शश्यावास कुंड सहित 12 गांवों का जागीरदार बनाया। इतना ही नहीं उन्होंने मीणा सरदार को जयगढ़ के खजाने की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी। भवानीराम की पुत्री बीचू बाई ने माणक चौक चौपड़ पर बने लक्ष्मीनारायण मंदिर को बनवाने में सहयोग दिया। उसके बाद माता महाक्ष्मी का विशेष अनुष्ठान करने के बाद मंदिर में विराजमान किया गया। मंदिर में स्थापित प्रतिमा एक ही शिला में बनी है। इसमें भगवान लक्ष्मीनारायण के वाम भाग में महालक्ष्मी जी विराजमान हैं। मंदिर की रक्षा के लिए गरुड़ देवता के अतिरिक्त जय विजय नामक द्वारपाल खड़े हैं।